Surguja News: सरगुजा संभाग में चल रहे धान खरीदी में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की जा रही है और करोड़ों रुपए का धान घोटाला का मामला सामने आ रहा है. जिला प्रशासन की टीम ने सरगुजा जिले के दरिमा और उदयपुर में स्थित अलग-अलग राइस मिल में छापा मार कार्रवाई की, जहां से 1.86 करोड़ का धान गायब मिला है.
कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि राजेश राइस मिल खोडरी उदयपुर में खाद्य विभाग व जिला विपणन अधिकारी द्वारा जांच की गई. जांच के समय मिल संचालक मयंक अग्रवाल उपस्थित थे. भौतिक सत्यापन में 4370 नग बोरा तथा टापा में 1400 नग बोरा धान प्रति बोरा 40 किलोग्राम कुल 5770 बोरी वजन 2308 क्विंटल धान पाया गया. जांच में यह पाया गया कि मिल द्वारा सत्यापन की तिथि तक कुल 5050 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका था.
धान के सत्यापन में 2742 क्विंटल कम
इस प्रकार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में उठाए गए धान के सत्यापन में 2742 क्विंटल कम पाया गया। वहीं गत वर्ष 2024-25 के लिए एफसीआई के लिए तैयार 5220 क्विंटल चावल मिल परिसर में प्लास्टिक बोरी व ढाला के रूप में पाया गया. इसके अतिरिक्त मिल के पीछे निर्माणाधीन गोदाम में बाहर से खरीदा गया लगभग 1200 क्विंटल चावल भी रखा हुआ पाया गया.
आठ जनवरी को सिद्धीविनायक राइस मिल, दरिमा, अंबिकापुर की संयुक्त जांच की गई. जांच के समय मिल संचालक संजय कुमार अग्रवाल उपस्थित थे। भौतिक सत्यापन में 17250 नग बोरा धान 40 किलोग्राम प्रति बोरा व चावल में 1447 क्विंटल धान मात्रा 2160 क्विंटल, 5400 नग बोरा पाया गया। इस प्रकार कुल 22650 बोरी धान 9060 क्विंटल भौतिक रूप से उपलब्ध पाया गया.
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जांच में पाया गया कि मिल द्वारा सत्यापन की तिथि तक कुल 12320 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका था, जो कि 30800 बोरी के बराबर है. इस प्रकार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में उठाए गए धान के सत्यापन में 8150 नग बोरा धान 3260 क्विंटल कम पाया गया. भौतिक सत्यापन के दौरान स्टॉक से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज मिल संचालक द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया.
भौतिक सत्यापन में धान की कमी पाए जाने पर संबंधित राइस मिलों द्वारा छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 की कंडिका 4 (3), 6 (1), 6 (3), 9 व 12 का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया है। जो कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है.
कैसे होती है धान खरीदी और कस्टम मिलिंग में गड़बड़ी?
- सबसे पहले धान बिचौलिया उन किसानों के नाम पर खरीदी केंद्र में पंजीयन कराते हैं जो किसान धान समर्थन मूल्य में नहीं बेचते हैं.
- इसके बाद फर्जी तरीके से फसल की गिरदावरी भी बिचौलिया करा लेते हैं यानि खेत खाली है तब भी उसमे धान की खेती दर्ज करा देते हैं.
- इसके बाद किसानों के नाम पर धान बेचने के लिए टोकन कटवा कर धान खरीदी केंद्र प्रभारी से मिली भगत कर कागजों में ही उनके नाम पर धान बेचते हैं.
- धान के बदले में खरीदी केंद्र प्रभारी या सीधे राइस मिलर से सेटिंग कर बिचौलिए उन्हें प्रति क्विंटल 2400 से ₹2500 के हिसाब से रुपये देते हैं.
- इसके बाद खरीदी केंद्र में खरीदी प्रभारी कागजो में धान खरीद लेता है और मिलर उस धान का खरीदी केंद्र से उठाव करना बता देता है.
- इसके बाद बाजार से चावल खरीदकर मिलर उस चावल को बोरों में पैक करता है और कस्टम मिलिंग का चावल बता कर सरकार के गोदाम में भेज देता है.
- इसके बाद मिलर को सरकार से प्रोत्साहन राशि और मिलिंग चार्ज के अलावा धान परिवहन का खर्च मिलता है.
