Ambikapur: अंबिकापुर में यूरिया की तस्करी का बड़ा मामला सामने आया है. यहां पर कृषि विभाग की जांच में इसका खुलासा हुआ है. हैरानी की बात तो यह है कि 4 साल की बच्ची के नाम पर यूरिया की बिक्री हुई है. इतना ही नहीं 95 किसानों के नाम पर कागजों में ही यूरिया बेचा गया है. करीब 4000 बोरी यूरिया की कालाबाजारी की गई है. इसके बाद यूरिया बेचने वाले विजय ट्रेडिंग को सील कर दिया गया है. दूसरी तरफ अब राजसात की कार्रवाई की जानी है, लेकिन कृषि विभाग के उपसंचालक के द्वारा कलेक्टर के पास समय पर फाइल नहीं भेजे जाने के कारण राजसात की कार्यवाही अटकी हुई है, जबकि जिला सत्र न्यायालय ने भी व्यापारी के द्वारा कोर्ट में किए गए अपील को खारिज कर दिया है. अब इसके बाद व्यापारी के द्वारा सरगुजा आयुक्त के पास अपील किया गया है.
यूरिया की कालाबाजारी का बड़ा खुलासा
केंद्र सरकार को पता चला कि अंबिकापुर में यूरिया की खपत बहुत अधिक हो रही है और अंबिकापुर के खरसिया रोड में स्थित विजय ट्रेडिंग में किसान अत्यधिक मात्रा में यूरिया खरीद रहे हैं. इसकी रिपोर्ट कृषि विभाग के अधिकारियों को मिली और इसके बाद कृषि विभाग की टीम ने दुकान में जाकर जांच की तो बड़ा खुलासा हुआ. इसके अलावा जिन किसानों ने अत्यधिक मात्रा में यूरिया खरीदा था उनसे बयान दिया गया तब पूरे गड़बड़ी का भंडाफोड़ हुआ है. पता चला है कि अप्रैल से लेकर जून 2025 तक यानी 3 महीने के भीतर इस दुकान से 95 किसानों के नाम पर यूरिया बिक्री में गड़बड़ी की गई है. 95 किसानों को यहां ऑनलाइन बायोमेट्रिक के माध्यम से 4743 बोरी यूरिया बेचना बताया गया है जबकि किसानों ने बताया कि उन्होंने मात्र 678 बोरी यूरिया खरीदा है किसानों के नाम पर यहां 50-50 बोरी यूरिया बेचना बताया गया है, जबकि किसानों ने तीन से पांच बोरी तक ही यूरिया खरीदा है.
जानकारी के बाद भी अब तक राजसात की कार्रवाई नहीं
जांच में इस गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद फर्टिलाइजर इंस्पेक्टर के द्वारा इसकी रिपोर्ट उपसंचालक कृषि के सामने प्रस्तुत की गई. इसकी फाइल कलेक्टर के पास पहुंची तब कलेक्टर ने दुकान के फर्टिलाइजर लाइसेंस को निरस्त कर दिया. अब दुकान में रखे गए खाद को सील किया गया है. लेकिन आगे की कार्रवाई नहीं बढ़ रही है. फर्टिलाइजर एक्ट के अनुसार दुकान में रखे गए खाद को राजसात किया जाना है. इसकी फाइल उप संचालक कृषि के द्वारा कलेक्टर को भेजा जाना है लेकिन कृषि विभाग की ओर उप संचालक पीतांबर सिंह दीवान के द्वारा इसकी फाइल आगे नहीं बढ़ाई जा रही है. यही वजह है कि राजसात नहीं हो पा रही है.
ये भी पढ़ें- Naxal Surrender: नक्सल संगठन को बड़ा झटका, सुकमा में 22 नक्सलियों ने एक साथ किया सरेंडर
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राजसात की कार्रवाई में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है, क्योंकि राजसात होने के बाद दुकान में रखे हुए खाद को नीलाम किया जाएगा और फिर उससे जो रुपए मिलेंगे वह राज्य सरकार के खजाने में जमा होगा. बताया जा रहा है कि फिलहाल 2 करोड रुपए का खाद दुकान में पड़ा हुआ है. यही वजह है कि कृषि विभाग के अधिकारियों के द्वारा राजसात के लिए तैयार फाइल में अभी तक हस्ताक्षर नहीं किया गया है. यही वजह है कि कलेक्टर भी आगे कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं. सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि राजसात की प्रक्रिया चल रही है. बहुत जल्द प्रक्रिया पूरी करने के बाद राजसात की कार्रवाई की जाएगी.
