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Ambikapur: जंगल की जमीन पर वन रक्षक के रिश्तेदार ने किया 3.5 एकड़ जमीन पर कब्जा, खोल दी ईंट भट्टी लेकिन रेंजर बेखबर

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जंगल की जमीन पर कब्जा

Ambikapur: सरगुजा जिले के उदयपुर इलाके में जंगल के भीतर करीब साढ़े तीन एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया गया है. यहां पर पेड़ों की पहले कटाई की गई. उसके बाद अब उस जमीन पर ईंट भट्टी और सरसों की खेती की गई है. यह कब्जा पिछले 6 महीने के भीतर शुरू किया गया और वन कर्मचारी की अनदेखी की वजह से लगातार कब्जा होता रहा. अब वन विभाग के जिम्मेदार लोगों पर भी सवाल उठ रहे हैं. दूसरी तरफ जानकारों का कहना है कि वन रक्षक के परिवार और रिश्तेदार लोग ही यहां कब्जा कर रहे हैं. यही वजह है कि वन विभाग जंगल पर हो रहे कब्जे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.

जानें क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार अंबिकापुर उदयपुर मुख्य मार्ग स्थित उद्यान विभाग के नर्सरी के पास मुख्य सड़क से कुछ दूरी के भीतर कब्जा किया गया है. यहां चारों तरफ तार से फेंसिंग भी कर दी गई है. हैरानी की बात तो यह है कि वन विभाग के कर्मचारी जंगलों में हमेशा मॉनिटरिंग का दावा करते हैं और उसके बावजूद जंगल पर कुछ दिन के भीतर ही कब्जा हो गया है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि गूगल मैप के जरिए भी यह देखा जा सकता है कि आखिर यहां किस तरीके से धीरे-धीरे कब्जा किया गया है. वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा बनवाने के चक्कर में पूरा खेल किया जा रहा है और बीट गार्ड के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है क्योंकि कब्जा करने वाले लोग उन्हीं के संरक्षण में यहां पूरा खेल कर रहे हैं.

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अधिकारियों ने साधी चुप्पी

इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल खामोश दिखाई दे रहे हैं. माना जा रहा है कि उन्हें भी इस अतिक्रमण की जानकारी है, लेकिन विभाग के ही कर्मचारी के परिवार के लोगों के द्वारा कब्जा किए जाने के कारण उनके द्वारा भी बड़ा एक्शन नहीं लिया जा रहा है. दूसरी तरफ अगर इसी तरीके से हालात यहां बना रहा तो आने वाले दिनों में और भी बड़े एरिया में अतिक्रमण किया जा सकता है. इसके बाद धीरे-धीरे मुख्य मार्ग तक कब्जा हो सकता है क्योंकि यह इलाका काफी महत्वपूर्ण और जमीन के लिहाज से बेशकीमती की भी है.

इस पूरे मामले पर जब उदयपुर रेंजर कमलेश राय से सवाल पूछा गया तो उन्होंने अनभिज्ञता जहिर की और कहा कि वे इसे दिखवाएंगे जबकि रेंजर के दफ्तर से यह जंगल और कब्जा स्थल महज दो किलोमीटर से भी कम है. वहीं, रेंजर का हल्केपन वाला बयान साफ कर रहा है कि यहां अफसरों को सब पता है लेकिन अघोषित तरीके से यहां जंगल को बेच दिया जा रहा है.

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