Ambikapur: सरगुजा जिले में स्थित SECL के अमेरा कोल माइंस में कोल माफियाओं के संरक्षण की वजह से पूरा गांव कोयला चोरी करने में जुट गया है. हर रोज 300 टन से अधिक कोयले की चोरी हो रही है. हर महीने करीब SECL को 5 करोड़ से अधिक रुपए का नुकसान हो रहा है लेकिन SECL प्रबंधन कोयला चोरी को रोकने में नाकाम साबित हुआ है.
ईट-भट्टों के आड़ में माफियाओं का खेल
चर्चा है कि पूरे गांव को कोयला चोरी के काम में उतारने में कोल माफियाओं का हाथ है. माफियाओं को नेताओं का संरक्षण है. इससे पुलिस भी कार्यवाही नहीं कर पा रही है. चोरी का कोयला कोल डिपो में बेचा जा रहा है, और ईट-भट्टें भी अवैध कोयले के भरोसे चल रहें हैं.
सरगुजा जिले में कोल माफिया एक बार फिर सक्रिय हो रहे हैं. हर साल कोल माफिया जनवरी से लेकर मई तक इसी तरीके से संगठित तरीके से गिरोह कोयला चोरी कराते हैं. इसके बाद उसे गांव वालों से खरीदते हैं और ट्रक में लोडकर उसे आसपास के भट्टों में ले जाते हैं.
गांव वालों को माइंस में भेजकर लाखों रुपये का कोयला करा रहे चोरी
वहीं कई माफिया भट्टों की आड़ में कोयला जमा करते हैं और फिर उसे कोल डिपो में बेचते हैं या फिर बनारस, रायपुर, बिलासपुर में सप्लाई कर देते हैं. इसमें कोल डिपो वाले पूरा साथ देते हैं. उनके द्वारा कोयला का दस्तावेज उपलब्ध करा दिया जाता है और कोयला वैध हो जाता है. इसमें खनिज विभाग के अफसरों की मिलीभगत होती है और यही वजह है कि कोल डिपो की जांच नहीं होती है और कई बार दिखावे के लिए जांच किया जाता है. यही वजह है कि अमेरा माइंस में माफिया का कब्जा हो गया है.
कोल माफिया को राजनैतिक संरक्षण है, पुलिस के छोटे अधिकारी हाथ डालने से डरते हैं तो कई बार खनिज अफसर उन्हें खुद ही बचा लेते हैं. दूसरी तरफ SECL के अफसर भी ख़ामोश रहते हैं और दिखावे के लिए पेट्रोलिग किया जाता है. बताया जाता है कि माइंस के अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध है, क्योंकि इस तरह सैंकड़ो गांव वाले कोयला चोरी करते हैं और यहां के अफसर सिर्फ पुलिस को सुरक्षा उपलब्ध कराने के नाम पर पत्र लिखते हैं और अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ले रहें हैं.
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पिछले महीने एसईसीएल के अमेरा कोल माइंस का एक्सटेंशन हुआ है. इसके बाद अब कोयले का खनन शुरू हो गया है लेकिन कोयला माफिया भी इसके साथ फिर से एक्टिव हो गए हैं. उनके द्वारा गांव के लोगों को कोयला चोरी के काम में झोंक दिया जा रहा है. महिलाएं बच्चे और पुरुष सीधे तौर पर खदानों में पहुंच जा रहे हैं. इसका वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल होने लगा है.
