CG Politics: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में कांग्रेस के भीतर सियासी ‘सूरज’ ढलता हुआ नजर आ रहा है. जिले में बड़ी संख्या में पदाधिकारियों ने इस्तीफा देकर पार्टी संगठन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि एक खास गुट को तवज्जो दी जा रही है और यही नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है. यहां 3-4 दिन पहले ही नई कार्यकारिणी का विस्तार किया गया था. अब नई नियुक्तियों के बाद पूर्व सांसद की बहू समेत करीब 10 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे जिला कांग्रेस कमेटी में हलचल मची हुई है. वहीं, BJP ने इसे लेकर तंज भी कसा है.
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में फिर ‘कलह’
सूरजपुर में कांग्रेस का कुनबा बिखरता दिख रहा है. एक साथ कई पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा देकर संगठन की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है. आरोप है कि ‘भूपेश गुट’ को प्राथमिकता और बाकी नेताओं की अनदेखी की जा रही है. कांग्रेस के भीतर ये नाराजगी नई नहीं है, लेकिन इस बार इस्तीफों ने संगठन की सेहत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
BJP ने कसा तंज
सवाल उठ रहे हैं कि क्या सूरजपुर में कांग्रेस दो धड़ों में बंट चुकी है? क्या गुटबाजी अब खुली लड़ाई में बदल रही है? अब इस पर बीजेपी चुटकी लेने से पीछे नहीं हट रही है. बीजेपी प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कण्डेय ने कहा कांग्रेस पार्टी गर्त की ओर जा रही है. कांग्रेस पार्टी में एक-दूसरे को नीचे दिखाने का काम करते है.
सूरजपुर में कांग्रेस पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद बीजेपी को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया. सांसद संतोष पांडेय ने कांग्रेस को बिना विचारधारा वाली पार्टी तक बता दिया. सवाल ये है क्या सूरजपुर का ये सियासी भूचाल आने वाले चुनावी समीकरण बदल देगा.
हालांकि कांग्रेस कह रही है लोकतंत्र जिंदा है. लेकिन इस्तीफों की ये कतार कुछ और कहानी बयां कर रही है. अगर सब ठीक है तो फिर इतने लोग एक साथ नाराज क्यों? और अगर नाराजगी है तो क्या सूरजपुर से उठी ये चिंगारी प्रदेश संगठन तक पहुंचेगी? इस पूरे मसले पर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने कहा- ‘हमारी पार्टी में प्रजातंत्र जीवित है. गुटबाजी अगर कहीं है तो बीजेपी में है. हम बातचीत से मसले सुलझाते हैं. इस मामले में भी प्रभारी से चर्चा की जाएगी.’
सूरजपुर में कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. बीजेपी तंज कस रही है और कांग्रेस सफाई दे रही है. अब देखना ये है क्या बातचीत से मामला सुलझेगा या फिर इस्तीफों का सिलसिला और लंबा होगा.
