CGMSC Scam: छत्तीसगढ़ CGMSC घोटाला मामले में ACB-EOW की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है. टीम ने रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, श्री शारदा इंडस्ट्रीज रायपुर के प्रोप्राइटर राकेश जैन और लाईजनर प्रिंस जैन को गिरफ्तार किया है.
CGMSC घोटाला मामले में 3 गिरफ्तारी
ACB-EOW ने ब्यूरो में रजिस्टर्ड अपराध नंबर 05/2025 (धारा 409, 120-बी भा.द.वि. एवं धारा 13(1)(द) सहपठित 13(2), 7(सी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 यथासंशोधित अधिनियम 2018) में बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आरोपियों को 18 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया है. इनमें-
1. अभिषेक कौशल – डायरेक्टर, रिकॉर्ड्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि., पंचकुला
2. राकेश जैन – प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर
3. प्रिंस जैन (शशांक चोपड़ा का जीजा) – लाइनर, रिकॉर्ड्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. शमिल हैं.
क्यों हुई गिरफ्तारी?
अधिकारियों की ओर से जानकारी दी गई है कि राज्य की आम जनता को फ्री डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पतालों, एफआरयू, सीएचसी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और उप स्वास्थ्य केन्द्रों में ‘हमर लैब’ योजना अंतर्गत क्रय किए जाने वाले मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की निविदा प्रक्रिया में पुल टेंडरिंग के माध्यम से मोहित कॉर्पोरेशन द्वारा निविदा प्राप्त की गई.
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि रिकॉर्ड्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. और श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा में भाग लेकर मोहित कॉर्पोरेशन को सहयोग किया गया. जांच में यह भी सामने आया है कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के उद्देश्य से कुछ फर्मों द्वारा आपसी समन्वय और कार्टेलाइजेशन किया गया. टेंडर में यही तीन फर्म शॉर्टलिस्ट हुई थीं, जिनके वित्तीय दर खोले गए.
तीनों पात्र फर्मों द्वारा भरे गए टेंडर में उत्पाद, पैक-साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल का विवरण समान पैटर्न में भरा गया. जिन उत्पादों का नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट रूप से अंकित नहीं था. उन्हें भी तीनों फर्मों द्वारा समान रूप से दर्शाया गया. दर भी समान पैटर्न में कोट किए गए, जिसमें सबसे कम दर मोहित द्वारा, उसके पश्चात आर.एम.एस. तथा श्री शारदा इंडस्ट्रीज द्वारा कोट की गई.
550 करोड़ रुपए का नुकसान
वहीं, इसके परिणाम में मोहित कॉर्पोरेशन द्वारा CGMSC को MRP से तीन गुना तक अधिक कीमत पर रिएजेंट्स एवं कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति कर शासकीय राशि का दुरुपयोग करते हुए अनुचित भुगतान प्राप्त किया गया, जिससे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपए की आर्थिक क्षति पहुंची है.
27 जनवरी तक पुलिस रिमांड
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 19 जनवरी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से तीनों को 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है. बता दें कि जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब’ योजना में शासकीय राशि के दुरुपयोग से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय कर आगे भी संबंधितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.
