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CG News: दामाखेड़ा का नाम बदलकर हुआ ‘कबीर धर्म नगर’, अधिसूचना जारी, सीएम विष्‍णु देव साय ने की थी घोषणा

Satyanam Samadhi Temple Damakheda

सत्यनाम समाधि मंदिर दामाखेड़ा

CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने बलौदाबाजार जिले की तहसील सिमगा के ग्राम दामाखेड़ा का नाम बदलकर ‘कबीर धर्म नगर’ कर दिया है. इसको लेकर सरकार ने आधिकारिक सूचना भी जारी कर दी. इसका नाम बदलने की घोषणा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की थी. दामाखेड़ा कबीर पंथ के अनुयायियों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है.

सीएम विष्‍णु देव साय ने की थी घोषणा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस नाम परिवर्तन की घोषणा कबीर संत समागम मेले के दौरान की थी. मुख्यमंत्री बनने के बाद वे दामाखेड़ा पहुंचे थे, जहां विश्व प्रसिद्ध सतगुरु कबीर संत समागम में शामिल होकर उन्होंने गांव का नाम बदलने का ऐलान किया. इस अवसर पर उन्होंने दामाखेड़ा के 10 किलोमीटर के दायरे में उद्योग स्थापित नहीं करने का आश्वासन भी दिया था. कार्यक्रम में प्रकाश मुनि साहेब को प्रणाम करते हुए उन्होंने कहा था कि एक छोटे किसान का बेटा मुख्यमंत्री बनकर यहां आशीर्वाद लेने आया है, ताकि छत्तीसगढ़ की जनता खुशहाल और समृद्ध बने.

कबीरपंथियों के लिए बेहद खास

रायपुर-बिलासपुर मार्ग पर सिमगा से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित दामाखेड़ा भले ही आकार में छोटा गांव हो, लेकिन कबीरपंथियों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण आस्था केंद्र माना जाता है. कबीर के सत्य, ज्ञान और मानवतावादी विचारों से जुड़े इस स्थान पर वर्ष 1903 में कबीरपंथ के 12वें गुरु उग्रनाम साहब ने कबीर मठ की स्थापना की थी. तभी से यह स्थान कबीरपंथियों का प्रमुख तीर्थ बन गया.

राज्य का सबसे बड़ा और पवित्र आश्रम

दामाखेड़ा का कबीर आश्रम छत्तीसगढ़ के अन्य आश्रमों की तुलना में सबसे प्रमुख और पवित्र माना जाता है. यहां से देशभर के कई आश्रमों की गतिविधियों का संचालन होता है. समाधि मंदिर की दीवारों पर कबीर साहब के जीवन से जुड़े प्रसंगों को सुंदर नक्काशी और चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है, जिसे देखने देश और विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर परिसर के मध्य वंशगुरु उग्रनाम साहब और गुरु माताओं की समाधियां स्थित हैं. यहां कबीर पंथ के प्रथम वंशगुरु मुक्तामणि नाम साहब का मंदिर भी बना है. सामने संगमरमर के चबूतरे पर कबीर पंथ का प्रतीक सफेद ध्वज लहराता है, जहां श्रद्धालु श्रद्धा से माथा टेकते हैं. यह स्थल विश्व स्तर पर प्रसिद्ध तीर्थों में गिना जाता है.

कबीरपं‍थ की सबसे महत्वपूर्ण गद्द‍ियों में से एक

दामाखेड़ा कबीरपंथ की महत्वपूर्ण गद्दियों में से एक है, जहां साल भर धार्मिक गतिविधियां चलती रहती हैं. मेले के दौरान यहां विशेष अनुष्ठान होते हैं और श्रद्धालुओं को दीक्षा भी दी जाती है. परिसर की दीवारों पर कबीरदास के जीवन प्रसंगों को चित्रों और कलात्मक नक्काशी के जरिए उकेरा गया है. पास ही कुदुरमाल में कबीरदास के प्रमुख शिष्य धरमदास के पुत्र चुड़ामनदास समेत अन्य गुरुओं की समाधियां भी स्थित हैं.

कैसे जाते हैं कबीर आश्रम?

यात्रा के लिहाज से दामाखेड़ा तक पहुंचना आसान है. हवाई मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए रायपुर सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है, जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है. रेल से आने वालों के लिए हावड़ा-मुंबई मुख्य रेललाइन पर रायपुर प्रमुख स्टेशन है, जबकि भाटापारा स्टेशन से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. सड़क मार्ग से रायपुर से बस और टैक्सी की नियमित सुविधा उपलब्ध है. सिमगा से इसकी दूरी करीब 10 किलोमीटर और रायपुर से लगभग 57 किलोमीटर है.

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