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सरकारी क्वार्टर से लेकर मंदिर और ‘मूलनिवासी दावा’ तक… प्रतापदेव वार्ड की एक जमीन ने क्यों बढ़ा दिया सियासी और सामाजिक टकराव?

Jagdalpur

जगदलपुर

Chhattisgarh News: के प्रतापदेव वार्ड में सरकारी क्वार्टर तोड़ने के बाद लंबे समय से विवादों में घिरी जमीन एक बार फिर सुर्खियों में है. कभी मल्टी स्टोरी पार्किंग, तो कभी दिगम्बर समाज को मंदिर के लिए जमीन दिए जाने की चर्चा के बीच अब भूमकाल स्मृति दिवस पर मूलनिवासी समाज ने इस भूमि पर अपना पारंपरिक जात्रा कर सूअर का बलि देकर अपना दावा पेश कर सियासी और सामाजिक हलचल को और तेज कर दिया है.कांग्रेस ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया

शहर के बीचों-बीच स्थित प्रतापदेव वार्ड की यह जमीन बीते कुछ महीनों से सियासी विवाद का केंद्र बनी हुई है. यहां पहले सरकारी क्वार्टर मौजूद थे, जो जर्जर हालत में होने के कारण तोड़ दिए गए. इसके बाद इस स्थान पर मल्टी स्टोरी पार्किंग बनाने की योजना बनी, डीपीआर भी तैयार करवाई गई, लेकिन कोरोना काल के दौरान यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई. इसी बीच यह खबर सामने आई कि उक्त जमीन दिगम्बर समाज को मंदिर निर्माण के लिए दी जा रही है. इस मुद्दे को लेकर मेन रोड व्यापारी के अलावा कांग्रेस ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और मामला और ज्यादा गरमा गया.

बलि प्रथा के माध्यम से जमीन पर अपना दावा जताया

विवाद अभी थमा भी नहीं था कि भूमकाल स्मृति दिवस के अवसर पर निकली मूलनिवासी समाज की रैली जब इस जमीन पर पहुंची, तो एक नया मोड़ सामने आया. मूलनिवासी समाज के लोगों ने इस भूमि को अपनी बताते हुए दावा किया कि यह जमीन जगतू माहरा की है और यहां पारंपरिक जात्रा की रस्म अदा करते हुए सूअर की बलि प्रथा के माध्यम से जमीन पर अपना दावा जताया. मूलनिवासी पदाधिकारियों का कहना है कि यह जमीन ऐतिहासिक रूप से मूल निवासियों की है और अब यहां बस्तरिया भवन बनाया जाएगा, ताकि बस्तर दशहरा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने की सुविधा हो सके।

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पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इस मांग को लेकर उन्होंने कई बार शासन-प्रशासन को पत्र लिखे, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इसी कारण समाज ने अपनी परंपरा के अनुसार इस भूमि पर अधिकार जताने का कदम उठाया है. मूलनिवासी संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में किसी भी प्रकार की अड़चन या हस्तक्षेप हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे. फिलहाल, प्रतापदेव वार्ड की यह जमीन एक बार फिर प्रशासन और राजनीति के लिए बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है.

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