Rajnandgaon News: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक घटना घटी है. थाना प्रभारी एमन साहू की सक्रिय पहल और संवेदनशील प्रयासों से चार साल पहले अंतरजातीय विवाह करने के कारण समाज द्वारा बहिष्कृत किए गए एक परिवार को पुनः समाज में सम्मानजनक स्थान मिल गया है. इस पहल से न केवल परिवार की सामाजिक बहाली हुई, बल्कि सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी गया.
जानें पूरा मामला
चार साल पहले नेहा प्रजापति ने अंतरजातीय विवाह किया था. इस विवाह के कारण उनके परिवार को समाज ने पूरी तरह बहिष्कृत कर दिया. गांव वालों ने उनसे बातचीत बंद कर दी, कोई उन्हें समझ में नहीं बुलाता था, न ही किसी सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता था. यह बहिष्कार इतना गहरा था कि परिवार सदस्यों को रोजमर्रा की जिंदगी में भी अपमान और अलगाव का सामना करना पड़ता था. इस स्थिति से परेशान होकर परिवार ने कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायतें और आवेदन दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. वर्षों तक यह परिवार अकेलेपन और सामाजिक बहिष्कार की मार झेलता रहा. थाना प्रभारी एमन साहू को जब इस मामले की जानकारी मिली, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया.
पंचायत और बुजुर्गों से की बात
उन्होंने परिवार से मुलाकात की. उनकी पीड़ा सुनी और समाज के प्रभावशाली लोगों, पंचायत प्रतिनिधियों तथा गांव के बुजुर्गों से बातचीत की. उन्होंने समझाया कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत हर व्यक्ति को बराबरी का अधिकार है तथा अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने वाली नीतियां हैं. एमन साहू ने समाज में जागरूकता फैलाने के लिए बैठकें आयोजित कीं, जिसमें जातिगत भेदभाव के दुष्परिणामों पर चर्चा हुई. उनकी लगातार कोशिशों और मध्यस्थता से अंततः समाज तैयार हो गया.
एक विशेष सभा में समाज ने औपचारिक रूप से परिवार को बहिष्कार से मुक्त घोषित किया और उन्हें पुनः सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का निमंत्रण दिया. पीड़िता नेहा प्रजापति और उनके ससुर रामु लाल प्रजापति ने भावुक होकर थाना प्रभारी एमन साहू और बसंतपुर पुलिस का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि पुलिस की इस पहल से उन्हें न केवल सम्मान वापस मिला, बल्कि जीवन में नई उम्मीद जगी है. परिवार अब सामान्य रूप से समाज में घुलमिलकर रह रहा है.
