CG News: छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष कक्षा 5वीं और 8वीं की केंद्रीकृत परीक्षाओं में किसी भी छात्र को फेल नहीं किया जाएगा. मुख्य परीक्षा में असफल रहने वाले विद्यार्थियों को पूरक परीक्षा का अवसर दिया जाएगा और यदि उसमें भी वे सफल नहीं हो पाते हैं, तो उन्हें अगली कक्षा में प्रवेश दे दिया जाएगा.
आरटीई के बाद 1 से 8 तक परीक्षाओं पर थी रोक
आरटीई लागू होने के बाद कक्षा 1 से 8 तक परीक्षाओं पर रोक थी. बाद में कई राज्यों से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की रिपोर्ट मिलने पर केंद्र सरकार ने आरटीई प्रावधानों में शिथिलता दी और 5वीं व 8वीं की परीक्षा लेने की अनुमति राज्यों को दी. इसके बाद राज्य सरकार ने पिछले साल से इन कक्षाओं की परीक्षाएं फिर से शुरू कर दी हैं.
16-17 मार्च से शुरू होगी परीक्षाएं
घोषित समय-सारणी के अनुसार इस वर्ष 5वीं की परीक्षा 16 मार्च से और 8वीं की परीक्षा 17 मार्च से शुरू होगी. इन परीक्षाओं में सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के छात्र भी शामिल होंगे.
पिछले साल हाई कोर्ट में लगाई थी याचिका
पिछले साल अचानक निर्णय और समय पर अधिसूचना जारी नहीं होने के कारण कई निजी स्कूल संचालकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. तब कोर्ट ने परीक्षा में शामिल होने का निर्णय स्कूलों पर छोड़ दिया था, जिसके चलते केवल 15 प्रतिशत निजी स्कूलों के छात्र ही परीक्षा में शामिल हो पाए थे. इस बार सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है.
विभाग ने तय किए परीक्षा से जुड़े मानदेय और शुल्क
शिक्षा विभाग ने परीक्षा से जुड़े मानदेय और शुल्क भी तय किए हैं. 5वीं की परीक्षा के लिए प्रति छात्र 55 रुपये और 8वीं के लिए 60 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा होगा. 5वीं की उत्तरपुस्तिका मूल्यांकन के लिए 2 रुपये और 8वीं के लिए 3 रुपये प्रति कॉपी दिए जाएंगे. मुख्य मूल्यांकनकर्ता को 100 रुपये प्रतिदिन और केंद्राध्यक्ष को 150 रुपये प्रतिदिन मानदेय मिलेगा.
मूल्यांकन सीलबंद पैकेट में रखे जाएंगे सुरक्षित
गाइडलाइन के अनुसार मूल्यांकन के बाद उत्तरपुस्तिकाओं को सीलबंद पैकेट में विकासखंड स्तर पर तीन महीने तक सुरक्षित रखा जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी की होगी. मूल्यांकन केंद्र संकुल विद्यालयों में बनाए जाएंगे. शिक्षा विभाग के अनुसार परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता का आकलन करना है, न कि उन्हें असफल घोषित करना.
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