CG News: सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ लगाई गई याचिका को खारिज कर दिया है. पूरा मामला छत्तीसगढ़ के कुछ आदिवासी गांवों में पादरियों और ईसाई मिशनरियों और की एंट्री पर बैन यानी रोक को लेकर है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि PESA कानून के तहत ऐसा कदम उठाना वैध है.
क्या है पूरा मामला?
कांकेर जिले में कई ग्राम पंचायतों ने गांवों में बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश निषेध संबंधी बोर्ड लगाए थे. कुछ ग्राम सभाओं द्वारा गांव के प्रवेश द्वारों पर ‘होर्डिंग/सूचना बोर्ड’ लगाए गए थे, जिसमें ईसाई पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी. ग्राम पंचायतों के इन फैसलों के खिलाफ संबंधित पक्षों द्वारा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि परंपराओं के संरक्षण के लिए पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं ऐसे निर्णय लेने के अधिकार रखती हैं.
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. 16 फरवरी 2026 के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज करने के साथ स्पष्ट किया कि पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं अपने सामाजिक-सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े विषयों पर निर्णय ले सकती हैं.
सुप्रमी कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुनाया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जोर देकर कहा कि हाई कोर्ट के सामने याचिकाकर्ता की दलीलें सीमित थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में कई नई बातें और आयाम जोड़े गए थे. ऐसे में वह फिर से हाई कोर्ट का रुख कर सकते थे.
गोंजाल्विस ने पीठ को बताया कि ईसाई पादरियों और धर्मांतरित ईसाइयों के गांव में प्रवेश पर प्रतिबंध को हाई कोर्ट ने असंवैधानिक नहीं ठहराया था.
