Chhattisgarh का ये समाज आज भी करता है अनोखी पूजा, यहां मंदिर नहीं, पहाड़ और जंगल को मानते हैं देवता
श्वेक्षा पाठक
छत्तीसगढ़ अपनी अनोखी परंपराओं, संस्कृति और खान-पान के लिए फेसम है.ऐसे ही सरगुजा के मांझी समाज में सरना पूजा प्रकृति को समर्पित है, जिसमें दूल्हा देव, बूढ़ा नाग देव, ठाकुर देव की आराधना होती है.मांझी समाज के 12 गोत्रों की एक सदियों पुरानी और अनोखी परंपरा है, जिसे सरना पूजा कहा जाता है. मांझी समाज के लोग मंदिर, मस्जिद या अन्य धार्मिक स्थलों में जाकर पूजा नहीं करते, बल्कि जल, जंगल, जमीन और पहाड़ को ही अपना ईष्ट मानकर उनकी आराधना करते हैं. इस समाज में सरना पूजा के बिना विवाह या शुभ कार्यों की शुरुआत नहीं होती. पहले सरना पूजा संपन्न होती है, तभी शादी-विवाह और लग्न कार्यक्रम तय किए जाते हैं.यह परंपरा मांझी समाज को अन्य समाजों से अलग पहचान देती है, जहां प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान और आस्था देखने को मिलती है.मांझी आदिवासी समाज में महादेव-पार्वती को इष्ट देव माना जाता है. कुछ लोग इन्हें शंकर के रूप में पूजते हैं, जबकि मांझी समाज महादेव और पार्वती के संयुक्त स्वरूप की आराधना करता है.