बिलासपुर में फर्जी डॉक्टर बनकर किया ऑपरेशन, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष समेत 27 लोगों की मौत, CBI जांच की मांग तेज
बिलासपुर: फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव मामले में अपोलो अस्पताल को क्लीन चिट
Bilaspur News: बिलासपुर के नकली डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव मामले में जांच अब पूरी हो चुकी है. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट सौंप दी है. आरोप है कि नरेंद्र विक्रमादित्य ने अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट बनकर मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की. इस वजह से 27 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा. वहीं, अपोलो हॉस्पिटल प्रबंधन को क्लीनचिट दे दी गई.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, आरोपी डॉ. नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन कैम ने खुद को MBBS, MRCP और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट बताकर बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट के तौर पर काम करता रहा. आरोपी डॉक्टर के कार्यकाल के समय 27 मरीजों की मौत का जिक्र आया. जब पुलिस ने मेडिकल रिकॉर्ड खंगाले तो पता कि उसने फर्जी नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज बना रखे थे.
इसके साथ ही पुलिस ने छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज, दमोह पुलिस, CMHO और अपोलो अस्पताल प्रबंधन समेत कई संस्थानों से फर्जी डॉक्टर के बारे में दस्तावेज जुटाए गए. आरोपी के खिलाफ पुलिस ने फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी और फर्जी तरीके से डॉक्टर बनकर इलाज करने का मामला दर्ज किया गया है.
CBI जांच की मांग गई
अपोलो अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी डॉक्टर 2006 में कार्यरत रहा. वही, छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद शुक्ल साल 2002 से 2006 के बीच 13 बार इलाज कराने पहुंचे. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें 21 जुलाई 2006 को भर्ती किया गया. 2 अगस्त 2006 को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी आरोपी डॉक्टर ने की. ऑपरेशन के कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई.
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इसके बाद उन्हें 18 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया, जहां उनकी 20 अगस्त 2006 को मृत्यु हो गई. अप्रैल 2025 में जब परिजनों को पता चला कि डॉक्टर फर्जी डिग्री के मामले में गिरफ्तार हुआ है तो FIR दर्ज कराई है. अब परिजनों ने CBI जांच की मांग की है.