बिलासपुर. छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के चिकित्सकों ने अपनी विशेषज्ञता, सूझबूझ और बेहतर टीमवर्क से एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है. दूसरी मंजिल से गिरने के बाद 23 वर्षीय युवक के शरीर में चार फीट से अधिक लंबी लोहे की सरिया आर-पार हो गई थी. सरिया मलद्वार के पास से शरीर में प्रवेश कर पेट और छाती को चीरते हुए बाहर निकल गई थी. बेहद गंभीर और जानलेवा स्थिति में सिम्स के चिकित्सकों ने जटिल ऑपरेशन कर युवक की जान बचा ली. इस दौरान किडनी, लीवर और प्रमुख रक्तवाहिनियों को सुरक्षित रखना चिकित्सकों के सामने बड़ी चुनौती थी.
जानकारी के अनुसार, कोरबा जिले के दीपका कॉलोनी निवासी 23 वर्षीय मुकेश कुमार मिस्त्री का काम कर रहा था. इसी दौरान दूसरी मंजिल से नीचे गिरने पर वह पहली मंजिल में लगी लोहे की सरिया में फंस गया. सरिया उसके शरीर में मलद्वार के पास से घुसकर पेट और छाती को चीरते हुए बाहर निकल गई. हादसे के बाद परिजनों ने काफी मशक्कत कर सरिया को काटा और युवक को तत्काल दीपका कॉलोनी स्थित अस्पताल पहुंचाया. वहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए सिम्स रेफर कर दिया.
आंतों के बीच से गुजर रही थी सरिया
सिम्स पहुंचने पर चिकित्सकों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया. जांच में सामने आया कि लंबी लोहे की सरिया शरीर के आर-पार हो चुकी थी और आंतों के बीच से गुजर रही थी. ऐसे में ऑपरेशन के दौरान आंतों के साथ किडनी, लीवर और प्रमुख रक्तवाहिनियों को सुरक्षित रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था.
सिम्स के ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी विभाग के चिकित्सक डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह के नेतृत्व में जटिल सर्जरी की गई. इस दौरान पीजी छात्र डॉ. आकांक्षा, डॉ. धनेश्वरी, डॉ. मंजू और डॉ. रजत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. चिकित्सकों की सूझबूझ और कुशलता से ऑपरेशन सफल रहा और युवक की जान बचाई जा सकी.
एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम का भी रहा अहम योगदान
इतने गंभीर मामले में सर्जरी के साथ एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही. एनेस्थीसिया विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति के नेतृत्व में टीम ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को नियंत्रित और स्थिर बनाए रखा. टीम में डॉ. अर्पणा मिश्रा सहित अन्य चिकित्सक शामिल रहे. वहीं नर्सिंग स्टाफ से दीपिका, कौशिक, मणिशंकर सहित अन्य कर्मचारियों ने सहयोग दिया.
टीमवर्क से बची मरीज की जान
सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति के मुताबिक मरीज के शरीर के आर-पार लंबी सरिया का होना अत्यंत चुनौतीपूर्ण स्थिति थी. ऐसे ऑपरेशन में सर्जरी के साथ एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है. सभी विभागों के आपसी समन्वय, चिकित्सकों की दक्षता और समय पर लिए गए निर्णय के कारण मरीज की जान बचाना संभव हो सका.
