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छत्तीसगढ़ में अनोखा जश्न.. हाथी के बच्चे के जन्म पर मनाई गई ‘छठी’, 7 गांव के लोग हुए शामिल

korba hathi ka baccha

हाथी के बच्चे की छठी

Chhattisgarh Elephant Calf Chhathi: हिंदू धर्म में बच्चे के पैदा होने के छठवे दिन ‘छठी’ मनाई जाती है. पर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हाथी के बच्चे के पैदा होने पर छठी मनाई गई. खास बात यह है कि, नवजात हाथी के पैदा होने पर मिलजुल कर 7 गांव के लोगों ने छठी मनाई. इस मौके पर भंडारे का आयोजन भी करवाया गया. (Hathi Ke Bacche Ki Chhathi)

यह है पूरा मामला

पूरा मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा के साजापानी गांव का है. जहां के वन मंडल करतला रेंज में घूम रहे 9 हाथियों के झुंड में नन्हे मेहमान के आने की खुशी मिली. बेबी एलीफेंट के जन्म की खुशी में छठी संस्कार आयोजित किया गया. कार्यक्रम का आयोजन बिल्कुल किसी त्यौहार जैसा किया गया. इस अवसर पर मंदिर के परिसर में पूजा-पाठ, भजन कीर्तन और भंडारे का आयोजन कराया गया. गांव वालों ने हाथी के बेबी का नाम ‘काशी’ रखा. (CG News)

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सात गांवों के ग्रामीण हुए शामिल

हाथी के बच्चे के छठी कार्यक्रम में 7 गावों के ग्रामीण शामिल हुए. जिनकी संख्या 1500 से भी ज्यादा बताई जा रही है. कार्यक्रम में वन अधिकारी के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे. इस दौरान सभी ने मिलकर पूजा में भाग लिया. आयोजन में महिलाओं और बच्चों ने भी हिस्सा लिया. छठी कार्यक्रम में लबेद के अलावा साजापानी, जामपानी, घुईचुआ, पहाड़गांव, काशीपानी और करबीचुंआ गांवों के ग्रामीण भी शामिल हुए. कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल सडीओ मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों की जमकर तारीफ की.

बता दें कि, छठी देश के कई कोनों में मनाई जाती है. माना जाता है कि, नवजात के जन्म के छठे दिन आधी रात को विधाता या षष्ठी देवी (छठी मैया) अदृश्य रूप से बच्चे के पास आती हैं और उसके भाग्य (नसीब की लकीरें) लिखती हैं. इंसान के बच्चों के लिए मनाई जाने वाली छठी, छत्तीसगढ़ के कोरबा में हाथी के बच्चे पैदा होने पर मनाई गई है. मामला काफी अनोखा माना जा जा रहा है.

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