Vistaar NEWS

CG News: Flipkart को HC से बड़ा झटका, रायपुर मर्डर केस में FIR रद्द करने वाली याचिका खारिज, आरोपियों ने ऑनलाइन मंगाया था चाकू

Chhattisgarh High Court (File Photo)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट(File Photo)

CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने फ्ल‍िपकार्ट के अधिकारियों द्वारा दायर की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है. याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट को निरस्‍त करने से इनकार कर दिया है. हाई कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश रमेश सिन्‍हा और न्‍यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले में स्‍पष्ट किया है कि जब तक शुरूआती जांच में संज्ञेय अपराध के तत्व सामने आ रहे हो, तो हाई कोर्ट को जांच या फिर ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई में हस्‍तक्षेप नहीं करना चाहिए.

दरअसल, रायपुर के मंदिर हसौद थाना क्षेत्र में हुई हत्या और लूट की घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ऑनलाइन साइट फ्लि‍पकार्ट और लाजिस्टिक पार्टनर (इलास्टिक रन) के मैनेजर, डिस्‍ट्रीब्यूटर समेत 6 कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी. पुलिस ने इन सभी को गिरफ्तार भी कर लिया था. हत्या करने वाले आरोपितों ने फ्ल‍िपकार्ट के जरिए चाकू मंगाया था, और इसी चाकू का इस्‍तेमाल उन्‍होंने हत्या में किया.

अधिकारियों को पहले से चेतावानी दी गई थी

पूरे मामले में पुलिस का आरोप है कि फ्ल‍िपकार्ट के अफसरों पहले भी चेतावानी दी गई थी कि ऐसे धारदार हथियारों की डिलीवरी न करें. इसके बावजूद उन्‍होंने लापरवाही बरती, जिसके कारण मानवीय जीवन खतरे में पड़ा. मामले में गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों ने याचिका दायर करके एफआईआर और चार्जशीट को रद्द करने की मांग की है.

वकीलों ने कोर्ट में दिया तर्क

अधिकारियों के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनकी कंपनी एक इंटरमीडियरी है और आईटी एक्ट की धारा 79 के अंतर्गत संरक्षित है. उन्‍होंने आगे कहा की बेचे गए चाकू साधारण किचन नाइफ थे, जो की आर्म्स एक्ट के दायरे में नहीं आते हैं. वकीलों ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप मनगढ़ंत हैं और कंपनी के प्रबंधकीय अधिकारियों पर अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारी थोपी जा रही है, जबकि उन लोगों का व्‍यक्तिगत रूप से इस अपराध में किसी प्रकार का हाथ नहीं है.

मामले में राज्य सरकार ने तर्क दिया है कि आरोपितों ने पुलिस के द्वारा दी गई चेतावनियों के बाद भी इस तरह की धारदार खतरनाक वस्‍तुओं की डिलीवरी को लगातार सुगम बनाए रखा. पुलिस ने जांच में पर्याप्‍त साक्ष्‍य एकत्रित करने के बाद ही चार्जशीट दाखिल की है.

हाई कोर्ट ने मामले में दायर याचिका को किया खारिज

हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के नेहारिका इंफ्रास्‍ट्रक्चर बनाम राज्य सरकार वाले मामले का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस जांच के शुरूआती चरणों में हस्‍तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि मामले में याचिकाकर्ताओं को इस पूरी घटना के बारे में ज्ञान था और क्या उनकी लापरवाही ने इस अपराध को बढ़ावा दिया है.

कोर्ट ने कहा कि यह ऐसे तथ्‍य हैं जिन पर ट्रायल के दौरान सबूतों के आधार पर ही निर्णय लिया जा सकता है. कोर्ट ने आगे कहा कि जब मामले में आरोप बेतुके या फिर असंभव न हों, तो एफआईआर रद्द करने की शक्ति का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. काेर्ट ने इस फैसले के साथ ही याचिका को खारिज कर दिया.

ये भी पढे़ं- CG News: युक्तियुक्तकरण पर हाई कोर्ट की मुहर, सरकार के निर्णय को ठहराया सही, सभी याचिकाएं खारिज

Exit mobile version