Sakti News: सक्ती जिले के चिस्दा स्थित कन्या आश्रम में रहने वाली बच्चियों का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है. वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि आश्रम की छोटी-छोटी बच्चियां हाथों में बाल्टियां लेकर दूर से पानी भरकर ला रही हैं. जिस उम्र में इन बच्चियों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में वे सिर और हाथों में पानी की भारी बाल्टियां उठाने को मजबूर हैं. यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
पानी की व्यवस्था बदहाल
जानकारी के अनुसार चिस्दा कन्या आश्रम में लंबे समय से पानी की व्यवस्था बदहाल है. आश्रम परिसर में नल-जल की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चियों को रोजाना दूर स्थित हैंडपंप या अन्य जलस्रोत से पानी लाना पड़ता है. ग्रामीणों का आरोप है कि अधीक्षिका द्वारा जानबूझकर बच्चियों से यह काम करवाया जाता है, जबकि आश्रम में पानी की व्यवस्था करना प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी है.
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के चिस्दा कन्या आश्रम से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें बच्चियां बाल्टियों में पानी भरकर दूर से लाती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद आश्रम में पानी की व्यवस्था और बच्चियों से वजन उठवाए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही आश्रम की अधीक्षिका की… pic.twitter.com/QMKg0tdJyj
— Vistaar News (@VistaarNews) September 2, 2026
बजट के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव
बच्चियों से इस तरह वजन उठवाने पर बाल अधिकारों का उल्लंघन भी माना जा रहा है. आश्रम में रहने वाली अधिकांश बच्चियां अनुसूचित जनजाति वर्ग से आती हैं और शासन द्वारा उनके रहने, खाने और पढ़ाई के लिए विशेष बजट दिया जाता है. इसके बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. बच्चियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर इसका बुरा असर पड़ रहा है. भारी बाल्टियां उठाने से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी पर भी उठ रहा है. आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी कितनी बार आश्रम का निरीक्षण करते हैं, यह भी जांच का विषय है. यदि समय-समय पर निरीक्षण होता तो ऐसी स्थिति सामने नहीं आती. स्थानीय लोगों ने कलेक्टर से इस मामले में जांच कर दोषी अधीक्षिका और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है
वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप
फिलहाल वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच करवाई जाएगी और आश्रम में पानी की स्थाई व्यवस्था की जाएगी. लेकिन सवाल यह है कि जब तक व्यवस्था नहीं सुधरती, तब तक इन मासूम बच्चियों को इसी तरह पानी ढोना पड़ेगा.
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