छत्तीसगढ़ की अनोखी परंपरा! इस जनजाति में लड़की नहीं…लड़के वाले देते हैं दहेज, बेटियों के जन्म पर मनाते हैं उत्सव
छत्तीसगढ़ की अनोखी परंपरा
Unique tradition of Chhattisgarh: एक ओर जहां कई जगहों पर बेटियों के जन्म पर लोग कई बार परेशान हो जाते हैं, बेटियों की भ्रूण हत्या कर दी जाती है, लेकिन छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में माझी जनजातियों के बीच इससे उल्टी परंपरा है. यहां अगर किसी के घर बेटी जन्म होता है तो खुशियां मनाई जाती है. इतना ही नहीं बेटियों की शादी के दौरान उन्हें दहेज नहीं देना पड़ता है, बल्कि लड़के वाले लड़की के पिता को दहेज में ₹8000 नगद और करीब दो क्विंटल चावल दहेज में देते हैं, तब उन्हें बेटी मिल पाती है.
यहां लड़की नहीं…लड़के वाले देते हैं दहेज
लड़की वालों को ₹8000 दहेज देने का सिस्टम समाज की बैठक में तय हुआ है और यह राशि कुछ सालों में 1000-500 रुपए ही बढ़ती है, माझी जनजाति सरगुजा के मैनपाट और सीतापुर इलाके में निवास करते हैं. यही वजह है कि माझी जनजातियों में बेटियों की संख्या अत्यधिक है सबसे बड़ी बात यह है कि इस दौर में जब लड़कियों की संख्या लड़कों के अनुपात में कम हो रही है लेकिन माझी जनजाति में बेटियों की संख्या संतुलित है.
किचड़ से करते हैं बारातियों का स्वागत
दूसरी तरफ माझी जनजाति की सबसे अनोखी परंपराएं भी है जो शादी से ही जुड़ा हुआ है यहां पर शादी में आए मेहमानों का स्वागत कीचड़ के साथ किया जाता है, जब किसी के घर में बारात पहुंचता है तब बारातियों के स्वागत के लिए लड़की वाले पहले से ही घर के पास कीचड़ तैयार कर रखते हैं और लड़की के भाई कीचड में डांस करते हैं. इसके बाद दूल्हा के पास जाते हैं और शादी शुरू होती है.
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मैनपाट में मांझी-मझवार जनजाति के लोग अपने गोत्र का नाम पशु, पक्षियों के नाम पर रखते हैं. इसमें भैंस, मछली, नाग और अन्य प्रचलित दूसरे जानवर होते हैं. ये अपने तीज त्यौहारों और उत्सवों में उन्हीं का प्रतिरूप बनते हैं. इसके साथ ही आयोजन का परम्परिक अंदाज में आनंद उठाते हैं.