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दुर्ग सेंट्रल जेल में नम हुई बंदियों की आखें, 1700 बहनों ने अपने भाईयों की कलाई पर बांधा रक्षासूत्र

Raksha Bandhan at the Central Jail

सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन

CG News: रक्षाबंधन भाई-बहन के उस रिश्ते का पर्व, जिसमें एक धागे में प्यार, भरोसा और जिंदगी भर साथ निभाने का वादा बंधा होता है. लेकिन जब यही राखी जेल की सलाखों के पीछे बैठे भाई की कलाई पर बंधे, तो भावनाएं और भी गहरी हो जाती हैं. दुर्ग सेंट्रल जेल में आज कुछ ऐसा ही भावुक नजारा देखने को मिला. सुबह से ही बहनों की कतार लगी रही. किसी के हाथ में राखी थी, तो किसी की आंखों में भाई से मिलने की खुशी और बिछड़ने का दर्द.

पंजीयन के बाद मिला बहनों को प्रवेश

दरअसल दुर्ग सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए. जेल के बाहर काउंटर लगाकर बहनों का पहचान पत्र के जरिए पंजीयन किया गया और इसके बाद उन्हें बारी-बारी से जेल के अंदर प्रवेश दिया गया. बड़े हॉल में बंदियों को शिफ्ट के अनुसार बैठाया गया, जहां बहनों ने अपने भाइयों के सामने बैठकर उनकी कलाई पर राखी बांधी. किसी ने भाई को मिठाई खिलाई, तो किसी ने जिंदगी की नई शुरुआत करने का वादा लिया.

जेल में राखी बांधने पहुंची 1700 बहनें

वहीं जेल अधीक्षक मनीष संभाकर के मुताबिक करीब 1700 बहनें अब तक पहुंच चुकी थीं. महिला बंदियों से मिलने उनके भाई भी पहुंचे. जेल में महिला और पुरुष बंदियों को मिलाकर करीब 2400 बंदी हैं. सुबह 7:30 से शाम 5 बजे तक मुलाकात का समय रखा गया है और करीब 5000 लोगों के पहुंचने का अनुमान है. दूर-दराज से आने वाली बहनों को समय निकलने के बाद भी मुलाकात का अवसर देने की व्यवस्था की गई. सुरक्षा के लिए महिला गार्ड अंदर और पुरुष पुलिस बल बाहर तैनात रहा. मोबाइल फोन अंदर ले जाने की अनुमति नहीं थी. बहनों द्वारा लाई गई मिठाइयों की भी जांच के बाद ही उन्हें बंदियों तक पहुंचाया गया.

भाई से मुलाकात कर बहनें हुई भावुक

वहीं मुलाकात के दौरान कई बहनों की आंखें नम हो गईं. बहन मधुबाला ने बताया कि उसका भाई दो महीने से जेल में है. भाई की एक गलती का दुख जरूर है, लेकिन राखी के दिन उसके लिए बस यही दुआ है कि वह जेल से बाहर निकलकर सही रास्ते पर चले और जिंदगी को नई दिशा दे. उन्होंने ने कहा कि जेल में उन्हें करीब 15 से 20 मिनट भाई के साथ रहने का समय मिला और भाई को राखी बांधकर वह बेहद खुश हैं.

बंदी भाइयों के लिए भी यह पल भावुक करने वाला रहा. एक बंदी ने कहा कि बहनों से राखी बंधवाकर वह बेहद खुश है और जेल प्रशासन ने राखी बांधने से जुड़ी जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं. यानी आज जेल की ऊंची दीवारें भाई-बहन के रिश्ते को रोक नहीं सकीं.सलाखों के उस पार बंधी राखी ने यही संदेश दिया कि रिश्ते कैद नहीं होते, और एक छोटी सी डोर भी जिंदगी बदलने की उम्मीद जगा सकती है.

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