Rakshabandhan: बालोद: वो कहते हैं न, छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया. इसी कड़ी में बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम देवरी के भोज साहू ने यह साबित किया है. दरअसल, भोज साहू द्वारा कबाड़ से जुगाड़ कर बनाई गई अनोखी राखी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. पर्यावरण प्रेमी एवं जल प्रहरी भोज साहू ने वेस्ट मटेरियल से करीब 6 फीट लंबी और 4 फीट चौड़ी तितलीनुमा राखी तैयार की है. जिसके जरिए पर्यावरण और जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है.
कबाड़ से बनाई 6 फीट राखी
दरअसल, ग्राम देवरी द निवासी भोज साहू ने साइकिल के पुराने पहिए के रिंग, स्कोप और अन्य कबाड़ सामग्री का उपयोग कर इस विशाल राखी को तैयार किया है. राखी को आकर्षक रूप देने के बाद सड़क किनारे नीम के पेड़ पर लगाया गया है. राहगीरों का ध्यान खींच रही इस राखी पर “जल ही जीवन है”, “जल है तो कल है” और पेड़-पौधों की सुरक्षा से जुड़े संदेश लिखे गए हैं.
10 वर्षों से लोगों को कर रहे जागरुक
भोज साहू पिछले करीब 10 वर्षों से राखी के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को जन-जागरूकता से जोड़ने का काम कर रहे हैं. वे इससे पहले पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, मतदान जागरूकता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और देश के वीर जवानों को समर्पित तिरंगा थीम पर भी राखियां तैयार कर चुके हैं. उनका कहना है कि कबाड़ समझकर फेंकी जाने वाली वस्तुओं का रचनात्मक इस्तेमाल कर समाज को सकारात्मक संदेश दिया जा सकता है.
भोज साहू की अपील बनी आकर्षण का केंद्र
भोज साहू की इस अनोखी पहल को देखने के लिए राहगीर रुक रहे हैं और उनके प्रयास की सराहना कर रहे हैं. उनका उद्देश्य सिर्फ राखी तैयार करना नहीं, बल्कि इसके जरिए लोगों को जल, पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करना है. कबाड़ से तैयार यह तितलीनुमा राखी आज “कबाड़ से जुगाड़” के साथ पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता की मिसाल बन रही है.
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