वेदांत शर्मा (कवर्धा)
Kawardha: कवर्धा के एक प्रतिष्ठित राजवैद्य परिवार का सबसे छोटा बेटा जिसने बचपन में बड़े सपने देखे. सत्ता उसका लक्ष्य नहीं थी. लक्ष्य था अपनी पहचान बनाना. आंदोलनों से लेकर जेल तक का सफर तय किया. जनता के बीच संघर्ष किया और आज वही चेहरा छत्तीसगढ़ की सत्ता के सबसे अहम केंद्रों में बैठा है. आज डिप्टी सीएम विजय शर्मा का जन्मदिन है. आइए जानते हैं उस सफर की कहानी, जिसने एक कार्यकर्ता को प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बना दिया.
बचपन से संघर्ष तक
“19 जुलाई 1973 को कवर्धा में जन्मे विजय शर्मा ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी पहचान वर्षों से समाज सेवा और आयुर्वेद से जुड़ी रही है. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी की राह नहीं चुनी, बल्कि संगठन और समाज की राह पकड़ ली. छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे भाजपा संगठन की मजबूत पहचान बन गया.”
संघर्ष जिसने पहचान बनाई
“कवर्धा की सड़कों पर आंदोलन हो या किसानों और आम लोगों के मुद्दे… विजय शर्मा हमेशा अग्रिम पंक्ति में दिखाई दिए. साल 2021 के कवर्धा हिंसा प्रकरण में दर्ज मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा. समर्थकों के लिए यह उनके संघर्ष का प्रतीक बना, तो विरोधियों ने इसे अलग नजरिए से देखा, लेकिन इस घटना के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया”
सबसे बड़ी राजनीतिक जीत
“2023 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा… सामने थे तत्कालीन मंत्री मोहम्मद अकबर. चुनाव परिणाम आया तो पूरे प्रदेश की नजर कवर्धा पर थी. विजय शर्मा ने जीत दर्ज की और कुछ ही दिनों बाद भाजपा नेतृत्व ने उन्हें सीधे छत्तीसगढ़ का उपमुख्यमंत्री बना दिया”
गृह मंत्री के रूप में जिम्मेदारी
“उपमुख्यमंत्री के साथ गृह विभाग की जिम्मेदारी मिली. इसके बाद राज्य में नक्सल विरोधी अभियान लगातार तेज हुआ. सरकार का कहना है कि सुरक्षा बलों की बहादुरी, बेहतर रणनीति और विकास कार्यों के संयुक्त प्रयास से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता मिली. विजय शर्मा लगातार इस अभियान की मॉनिटरिंग करते रहे और कई बार सार्वजनिक रूप से नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई.
कवर्धा को क्या मिला?
- “लेकिन विजय शर्मा की पहचान सिर्फ गृह मंत्री के रूप में नहीं बनी. अपने विधानसभा क्षेत्र कवर्धा में भी कई बड़ी परियोजनाएं उनके नाम से जुड़ती हैं. हजारों जरूरतमंद परिवारों को प्रधानमंत्री आवास
- योजना का लाभ दिलाने के प्रयास…
- विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर के लिए लगभग 146 करोड़ रुपये के पर्यटन कॉरिडोर की योजना को
- मंजूरी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका रही.
- और वर्षों पुरानी मांग रहे चिकित्सा महाविद्यालय को कवर्धा तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल इन परियोजनाओं को उनके समर्थक क्षेत्र के विकास की बड़ी उपलब्धियां मानते हैं.
संघर्ष… संगठन… सत्ता और विकास
विजय शर्मा की राजनीति इन्हीं चार शब्दों के इर्द-गिर्द घूमती है. समर्थक उन्हें जमीन से जुड़ा नेता बताते हैं, जबकि राजनीतिक विरोधी उनकी कार्यशैली पर सवाल भी उठाते हैं, लेकिन यह सच है कि पिछले कुछ वर्षों में विजय शर्मा छत्तीसगढ़ की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में अपनी जगह बना चुके हैं.
एक कार्यकर्ता से उपमुख्यमंत्री तक का सफर…
आंदोलन से प्रशासन तक की जिम्मेदारी… और कवर्धा से पूरे छत्तीसगढ़ तक अपनी पहचान. आज विजय शर्मा अपना जन्मदिन मना रहे हैं. उनके समर्थकों के लिए यह सिर्फ एक नेता का जन्मदिन नहीं, बल्कि संघर्ष से शिखर तक पहुंचने की कहानी का उत्सव है.
