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CG News: PHE दफ्तर में ठेकेदारों का बवाल, 200 ठेकेदारों का 100 करोड़ का भुगतान अटका, नहीं बढ़ रहा जल जीवन मिशन का काम

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PHE ऑफिस पहुंचें ठेकेदार

CG News: अंबिकापुर में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के दफ्तर के बाहर जल जीवन मिशन योजना के तहत काम करने वाले ठेकेदारों ने जमकर बवाल काटा. ठेकेदारों ने काम करने के बाद भी भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि सरगुजा संभाग के करीब 200 से अधिक ठेकेदारों का 100 करोड़ से अधिक का भुगतान सरगुजा जिले में पिछले दो सालों से लटका हुआ है, उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है और दूसरी तरफ काम करने का दबाव बनाया जाता है. इसके बाद ठेकेदारों ने विभाग के कार्यपालन अभियंता से मुलाकात की.

ठेकेदारों का क्या कहना है?

सरगुजा जिले में जल जीवन मिशन का काम करने वाले ठेकेदार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराज हैं. ठेकेदारों का कहना है कि उनसे इंजीनियर कमीशन मांगते हैं और कमीशन नहीं देने पर निर्माण कार्यों का पूरा मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है. कई ठेकेदारों ने साल डेढ़ साल पहले बिल भी लगा दिया है लेकिन उसके बावजूद अब तक उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है. वहीं ठेकेदारों पर लगातार एक के बाद एक नियम थोपे जा रहे हैं.

ठेकेदार आत्मदाह की चेतावनी दी

विभाग के दफ्तर में बड़ी संख्या में ठेकेदार तक पहुंचे. जब रजनीकांत नामक ठेकेदार ने भुगतान नहीं होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी थी और कलेक्टर के अलावा पुलिस अधीक्षक के नाम आवेदन लिखा था, इस आवेदन के बाद ठेकेदार संघ के लोग एक्टिव हो गए और सीधे दफ्तर पहुंच गए.

इंजीनियर ठेकेदारों को परेशान करता है

ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि विभाग जहां समय पर भुगतान नहीं कर रहा है और उन्हें बैंकों से नोटिस मिलने लगा है. दूसरी तरफ धर्मेंद्र सिंह नामक इंजीनियर ठेकेदारो को परेशान करता है और इसके कारण उन्होंने उसकी शिकायत विभाग के बड़े अफसरों और सांसद विधायक से की थी. ठेकेदारों ने लगभग 1 साल तक उसकी लगातार शिकायत किया तब जाकर 6 मार्च 2026 को उसका ट्रांसफर किया गया लेकिन फिर 10 मार्च 2026 को ट्रांसफर आदेश रद्द कर दिया गया.

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राजनीतिक पहुंच के कारण ट्रांसफर रद्द हो गया

ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि उनकी राजनीतिक पहुंच होने के कारण उनका ट्रांसफर रद्द कर दिया गया. बताया गया है कि एक राजनीतिक दल के पदाधिकारी, उसके रिश्तेदार हैं और नेताजी का पूरे प्रदेश में वर्चस्व है क्योंकि वे संगठन में बड़े पद पर हैं. इसी कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है और 8 साल से वह अंबिकापुर में है.

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