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पीआरए ग्रुप फायरिंग-डकैती साजिश मामले में अमन साहू समेत सभी 7 आरोपित दोषमुक्त

रायपुर. गंज थाना क्षेत्र में पीआरए ग्रुप के कार्यालय में फायरिंग और डकैती की साजिश के मामले में अदालत ने गैंगस्टर अमन साहू समेत सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया है. तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, रायपुर की अदालत ने मामले में पेश साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा.

पुलिस ने रोहित स्वर्णकार, मुकेश कुमार, देवेंद्र सिंह, राजबीर सिंह, पप्पू सिंह उर्फ पापसा और अमन साहू समेत अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 399, 402, 386 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया था. आरोप था कि आरोपित रेलवे स्टेशन के आसपास स्थित पीआरए ग्रुप के ठिकाने पर डकैती डालने और रंगदारी के लिए दहशत फैलाने की साजिश रच रहे थे.

गवाह की पहचान पर भी उठे सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन के साक्ष्यों में कई विसंगतियां सामने आईं. पुलिस ने जिस व्यक्ति को मयंक सिंह के नाम से पेश किया था, उसकी जिरह के दौरान पहचान सुनील कुमार मीणा के रूप में सामने आई. अभियोजन पक्ष कथित गवाह की पहचान और मामले में उसकी भूमिका को ठोस साक्ष्यों के जरिए स्थापित नहीं कर सका.

अदालत के समक्ष कथित पिस्टल की बरामदगी और जब्ती की कार्रवाई से जुड़े साक्ष्यों पर भी सवाल उठे. इन परिस्थितियों के चलते अभियोजन की कहानी संदेह से परे साबित नहीं हो सकी.

अमन साहू की 2025 में हो चुकी है मौत

मामले के प्रमुख आरोपित अमन साहू की 11 मार्च 2025 को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो चुकी है. उसे झारखंड पुलिस की कस्टडी में रायपुर से रांची ले जाया जा रहा था. पुलिस के अनुसार, पलामू में वाहन दुर्घटना के बाद अमन ने एक पुलिसकर्मी की इंसास राइफल छीनकर भागने और फायरिंग करने की कोशिश की थी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हुई थी.

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की ओर से आरोपों को प्रमाणित नहीं कर पाने के आधार पर अमन साहू समेत मामले के सभी आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया.

पिस्टल बरामदगी को भी बनाया गया था आधार

उस समय पुलिस ने दावा किया था कि रोहित स्वर्णकार के कब्जे से पिस्टल और मैगजीन बरामद हुई है. इसके बाद पुलिस ने मध्यप्रदेश से राजबेर सिंह चावला को गिरफ्तार कर हथियार उपलब्ध कराने से जुड़े मामले में कार्रवाई की थी. पुलिस की कहानी में इस कथित साजिश के तार मयंक सिंह से भी जोड़े गए थे. पुलिस का आरोप था कि वह विदेश से गैंग को ऑपरेट कर रहा था.

बचाव पक्ष बोला- साबित नहीं कर सकी पुलिस

बचाव पक्ष के अधिवक्ता के मुताबिक, अभियोजन पक्ष ने आरोपियों पर डकैती की योजना बनाने और हथियार रखने के आरोप लगाए, लेकिन ट्रायल के दौरान इन आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं किया जा सका. बचाव पक्ष ने मयंक सिंह के नाम और पहचान को लेकर भी सवाल उठाए. दलील दी गई कि जिस व्यक्ति को मयंक सिंह के रूप में केस से जोड़ा गया, उसकी पहचान और उसे सुनील कुमार मीणा बताए जाने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी. कथित साजिश और हथियार से जुड़े साक्ष्यों को उस स्तर तक प्रमाणित नहीं कर पाया, जिससे आरोप कानूनी रूप से साबित हो सकें.

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