बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तेंदूपत्ता वन लॉट की नीलामी में सफल खरीदारों से 2 प्रतिशत एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (एबीएस) राशि की वसूली के खिलाफ दायर सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने आज 13 अगस्त को यह साझा आदेश सुनाया.
मामला छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा 24 जनवरी 2023 को जारी आदेश और 25 जनवरी 2023 के परिणामी पत्र से जुड़ा था. इन आदेशों के माध्यम से तेंदूपत्ता वन लॉट के सफल खरीदारों से खरीद मूल्य का 2 प्रतिशत एबीएस के रूप में वसूलने तथा राशि छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड में जमा कराने के निर्देश दिए गए थे. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता का पूरा कारोबार 1964 के तेंदूपत्ता व्यापार विनियमन कानून के तहत राज्य के नियंत्रण में है. उनका कहना था कि वे वनवासियों से सीधे तेंदूपत्ता नहीं खरीदते, बल्कि राज्य की वैधानिक नीलामी के जरिए वन लॉट खरीदते हैं. इसलिए उन पर जैव विविधता कानून के तहत 2 प्रतिशत एबीएस राशि की देनदारी लागू नहीं होती.
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि 1964 का तेंदूपत्ता कानून तेंदूपत्ता के संग्रहण, खरीद और निपटान को नियंत्रित करता है, जबकि जैव विविधता कानून, 2002 जैव विविधता के संरक्षण और जैव संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से होने वाले लाभ के समान बंटवारे से संबंधित है. दोनों कानून अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे के पूरक क्षेत्रों में काम करते हैं. कोर्ट ने यह भी माना कि केवल इस आधार पर कि तेंदूपत्ता सरकारी व्यवस्था के माध्यम से नीलाम किया गया है, व्यावसायिक उपयोग करने वाले खरीदार एबीएस व्यवस्था से बाहर नहीं हो जाते. तेंदूपत्ता को जैव संसाधन मानते हुए अदालत ने कहा कि बाद में उसकी प्रसंस्करण या अन्य प्रक्रिया होने से एबीएस संबंधी वैधानिक दायित्व समाप्त नहीं होता.
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि 24 नवंबर 2022 का पत्र, 24 जनवरी 2023 का आदेश और 25 जनवरी 2023 का परिणामी पत्र अधिकार क्षेत्र की त्रुटि, अवैधानिकता या मनमानेपन से ग्रस्त नहीं हैं. इसलिए इन आदेशों में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है और सभी रिट याचिकाएं खारिज की जाती हैं. लंबित अंतरिम आवेदन भी समाप्त कर दिए गए हैं. हालांकि, आगे की कार्रवाई संबंधित कानून, नियम और विनियमों के अनुसार ही करने का निर्देश दिया गया है.
फैसले का सीधा असर यह है कि तेंदूपत्ता वन लॉट के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े सफल खरीदारों पर 2 प्रतिशत एबीएस वसूली की व्यवस्था को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है. मामले में न्यायालय ने लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया.
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