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विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाने मुख्यमंत्री को नेता प्रतिपक्ष डॉ. महंत ने लिखा पत्र

Congress leader Charan Das Mahant

कांग्रेस नेता चरण दास महंत

रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश की मूलभूत समस्याओं पर सार्थक चर्चा और जनहित के मुद्दों पर विस्तृत विमर्श सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है. उन्होंने आगामी विधानसभा सत्रों की अवधि बढ़ाने के साथ बैठकों की संख्या में वृद्धि करने की मांग की है. डॉ. महंत का कहना है कि विधानसभा केवल विधायी कार्यवाही पूरी करने का मंच नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को उठाने और सरकार की जवाबदेही तय करने वाली सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है. (Charandas Mahant Letter to CM Vishnu Deo Sai)

15 अक्टूबर को लिखे पत्र में नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि प्रदेश इस समय किसानों की परेशानियों, बिजली संकट, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, जर्जर सड़कों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं की चुनौतियों, अधोसंरचना के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दों से जूझ रहा है. इन विषयों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर गंभीर चर्चा और ठोस निर्णय लेने की जरूरत है. उनके मुताबिक, इन समस्याओं का प्रभावी समाधान केवल प्रशासनिक आदेशों से नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद और विचार-विमर्श से संभव है. (Leader of Opposition Dr. Charandas Mahant Writes to CM Vishnu Deo Sai to Extend Assembly Session Duration)

सीमित समय में महत्वपूर्ण मुद्दों पर नहीं हो पाती चर्चा

डॉ. महंत ने पत्र में उल्लेख किया है कि पिछले कुछ विधानसभा सत्रों में सदन की कार्यावधि सीमित रहने के कारण कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषयों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाती. विपक्ष को भी जनसमस्याओं को विस्तार से उठाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलता. कई बार ध्यानाकर्षण, स्थगन और शून्यकाल की सूचनाएं भी विस्तृत चर्चा के बिना रह जाती हैं. इससे सदन में संवाद और जवाबदेही की मूल भावना प्रभावित होती है.

सदन में समाधान नहीं तो सड़कों पर पहुंचती हैं समस्याएं

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब संसद या विधानसभा जैसे लोकतांत्रिक मंचों पर जनता की समस्याओं को पर्याप्त समय और गंभीरता से नहीं सुना जाता, तो वे समाप्त नहीं होतीं, बल्कि सदन से बाहर निकलकर सड़कों तक पहुंच जाती हैं. जिन मुद्दों का समाधान सदन में चर्चा के जरिए निकाला जा सकता है, वे सार्वजनिक आंदोलनों, धरनों और विरोध-प्रदर्शनों का रूप लेने लगते हैं.

उन्होंने प्रदेश में स्कूली बच्चों के अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरने को भी चिंताजनक बताया. डॉ. महंत के अनुसार, लोकतंत्र में विरोध और आंदोलन नागरिकों के अधिकार हैं, लेकिन समस्याओं के समाधान के लिए सदन के भीतर पर्याप्त अवसर उपलब्ध होने से असंतोष को समय रहते संवाद के माध्यम से दूर किया जा सकता है.

विधानसभा अध्यक्ष और सभी दलों से चर्चा का सुझाव

डॉ. महंत ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने और जनहित के मुद्दों पर सार्थक विमर्श सुनिश्चित करने के लिए आगामी विधानसभा सत्रों की अवधि और बैठकों की संख्या बढ़ाने की पहल की जाए. उन्होंने सुझाव दिया है कि इस विषय पर विधानसभा अध्यक्ष, कार्यमंत्रणा समिति और सभी दलों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श कर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे सदन को अधिक कार्यदिवस मिल सकें.

उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष राजनीतिक रूप से अलग-अलग विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन जनहित के प्रश्नों पर दोनों का संवैधानिक दायित्व समान है. विधानसभा में सरकार को अपनी नीतियों और निर्णयों का पक्ष रखने तथा विपक्ष को सवाल उठाने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, ताकि जनता से जुड़े विषयों पर तथ्यपूर्ण और गंभीर चर्चा हो सके.

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