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CG News:  च्वाइस सेंटरों के QR कोड से 20 से 25 लाख की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार… Raipur के बड़े परिवार से हैं ताल्लुक 

cyber crime

सांकेतिक फोटो

CG News:  बिलासपुर. च्वाइस सेंटर संचालकों के QR Code का दुरुपयोग कर लाखों रुपए की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का रेंज साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है. मामले में रायपुर निवासी दो आरोपियों अंकित आहूजा (32) और आशीष केवटवानी (32) को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बिलासपुर सहित प्रदेश के नौ जिलों में करीब 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाया. अब तक सामने आए मामलों में धोखाधड़ी की रकम करीब 20 से 25 लाख रुपए आंकी गई है. (CG Choice Center QR Code Fraud)

 पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लाख दो हजार रुपए नकद, घटना में प्रयुक्त एक बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं. मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है.

QR Code का फोटो लेकर करते थे ठगी

पुलिस के मुताबिक, बिलासपुर जिले के बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 5 अक्टूबर को दोपहर करीब 12.38 बजे एक व्यक्ति बलेनो कार से उनके सेंटर पहुंचा. उसने खुद को फोन-पे से जुड़े लेन-देन का व्यक्ति बताते हुए कहा कि QR Code के माध्यम से आने वाली रकम के बदले उसे नकद भुगतान कर दिया जाए. संचालक की सहमति के बाद उसने QR Code का फोटो अपने मोबाइल में लिया और वहां से चला गया.

इसके बाद QR Code का इस्तेमाल कर 16 हजार रुपए का लेन-देन किया गया. संचालक ने संबंधित व्यक्ति को रकम दे दी, लेकिन अगले दिन उनके बैंक खाते पर रोक लग गई. बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि फोन-पे खाते का संबंध साइबर ठगी की रकम से होने के कारण उसे होल्ड किया गया है. इसके बाद च्वाइस सेंटर संचालकों के वाट्सऐप समूह से उन्हें पता चला कि इसी तरह अन्य संचालकों के साथ भी धोखाधड़ी हुई है.

एक आरोपी QR Code भेजता, दूसरा करता था लेन-देन

शिकायत के बाद रेंज साइबर पुलिस ने जांच शुरू की. वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गठित टीम ने आरोपियों की तलाश की. इसी दौरान अंकित आहूजा हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में दोबारा इसी तरह की वारदात करने के प्रयास में घूमता मिला. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर ठगी करना स्वीकार किया.

पुलिस के अनुसार, आरोपियों का तरीका यह था कि अंकित अलग-अलग च्वाइस सेंटर और कॉमन सर्विस सेंटर पहुंचकर संचालकों के QR Code का फोटो अपने मोबाइल से साथी आशीष को भेजता था. इसके बाद आशीष उस QR Code के जरिए रकम का लेन-देन करता था. अंकित सेंटर संचालक से उसके बदले नकद रकम लेकर वहां से निकल जाता था. बाद में जब संचालकों के बैंक खाते साइबर ठगी की रकम से जुड़े होने के कारण होल्ड होते थे, तब उन्हें धोखाधड़ी की जानकारी मिलती थी.

नौ जिलों में फैला था नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बिलासपुर के अलावा रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले के च्वाइस सेंटर संचालकों को भी निशाना बनाया. अब तक करीब 45 पीड़ितों के आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनके आधार पर धोखाधड़ी की कुल रकम 20 से 25 लाख रुपए के बीच होने का अनुमान है. पुलिस मामले में अन्य पीड़ितों और लेन-देन से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है.

इस कार्रवाई में रेंज साइबर थाना प्रभारी प्रसाद सिन्हा, सहायक उप निरीक्षक अशोक कश्यप तथा आरक्षक दीपक उपाध्याय और दीपक यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

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