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अब केवल सुपेबेड़ा नहीं… देवभोग में भी पांव पसार रहा किडनी रोग… अब तक 10 लोगों की हुई मौत

इनपुटः पुरूषोत्तम पात्र.

गरियाबंद. जिले में किडनी की बीमारी का मामला अब केवल सुपेबेड़ा तक सीमित नहीं रह गया है. देवभोग नगर मुख्यालय में भी किडनी रोग से पीड़ित मरीजों और मौतों का मामला सामने आया है. नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 3 के रहवासियों का दावा है कि पिछले छह वर्षों में 10 से अधिक लोगों की किडनी संबंधी बीमारी के चलते मौत हो चुकी है. इससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है.

पानी को लेकर बढ़ी चिंता

वार्ड क्रमांक 3 के अधिकांश लोगों ने अपने घरों के बोर और आसपास के जलस्रोतों का पानी पीने के लिए इस्तेमाल करना बंद कर दिया है. अब कई परिवार बोतलबंद पानी या करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित जलस्रोत से पानी लाकर पी रहे हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक वर्ष 2023 के बाद यह बदलाव देखने को मिला. इससे पहले लोग लंबे समय से मोहल्ले के ही जलस्रोतों का पानी इस्तेमाल करते थे. एक के बाद एक लोगों के किडनी रोग से पीड़ित होने के बाद स्थानीय लोगों ने पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग उठाई. शुरुआती जांच में वार्ड के 50 से अधिक जलस्रोतों के पानी में टीडीएस की मात्रा करीब 800 से 1200 मिलीग्राम प्रति लीटर तक मिलने की बात सामने आई. इसके बाद लोगों ने एहतियात के तौर पर पेयजल का स्रोत बदल दिया.

मौतों का बढ़ता आंकड़ा, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार किडनी रोग के मामले सामने आने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. एक पीड़ित परिवार ऐसा भी है, जहां मरीज अपनी पत्नी की किडनी के सहारे उपचार और जीवन के लिए संघर्ष कर रहा है. ग्रामीण और वार्डवासी लगातार पानी की जांच तथा वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था की मांग करते रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन का पूरा ध्यान सुपेबेड़ा क्षेत्र पर केंद्रित रहने के कारण देवभोग मुख्यालय में सामने आ रही समस्या पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया. उनका कहना है कि वार्ड क्रमांक 3 के अलावा नगर के करीब आधे हिस्से में भी जलस्रोतों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर देवभोग नगर में किडनी रोग से मौतों की संख्या 20 से अधिक होने का भी दावा किया जा रहा है.

समय रहते जांच और शुद्ध पेयजल की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे देवभोग नगर के जलस्रोतों की वैज्ञानिक जांच कराने, किडनी रोगियों की स्वास्थ्य जांच कराने और प्रभावित इलाकों में सुरक्षित पेयजल की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो देवभोग भी भविष्य में सुपेबेड़ा जैसी गंभीर स्थिति का सामना कर सकता है. वहीं, पीएचई विभाग के उपयंत्री बीके सिदार के मुताबिक पानी में टीडीएस की मात्रा को लेकर विभागीय स्तर पर जांच और मानकों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जाना जरूरी है. स्थानीय लोगों द्वारा बताए गए आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और किडनी रोग के कारणों की वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

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