रायपुर. छत्तीसगढ़ में जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) फंड के कथित दुरुपयोग और घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी ने सतपाल सिंह छाबड़ा, पिता धर्मपाल सिंह छाबड़ा, को 1 सितंबर 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया. उन्हें रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने पांच दिन की ईडी हिरासत मंजूर की है.
ईडी के अनुसार, यह जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर और छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी. जांच में सामने आया कि खनन प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के विकास के लिए गठित जिला खनिज न्यासों के फंड का कथित तौर पर एक संगठित सिंडिकेट द्वारा दुरुपयोग किया गया.
9,188 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का मामला
जांच एजेंसी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान विभिन्न जिलों को जिला खनिज न्यास के तहत करीब 9,188.20 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. आरोप है कि इस राशि के एक हिस्से को निर्धारित उद्देश्यों के बजाय आपूर्ति आधारित कार्यों में लगाया गया, जहां कीमतों में हेराफेरी और कमीशनखोरी की अधिक गुंजाइश थी.
ईडी के मुताबिक, इस राशि का एक बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के माध्यम से भेजा गया. आरोप है कि एजेंटों और संपर्क सूत्रों ने दर अनुबंध वाले आपूर्तिकर्ताओं को जारी खरीद आदेशों के मूल मूल्य पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला. जांच एजेंसी का दावा है कि कमीशन का एक बड़ा हिस्सा काम के आदेश जारी कराने और भुगतान करवाने के बदले सरकारी अधिकारियों तथा प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया गया.
सिंडिकेट में अहम भूमिका का आरोप
ईडी के अनुसार, सतपाल सिंह छाबड़ा इस कथित सिंडिकेट में प्रमुख संपर्क सूत्र और वित्तीय समन्वयक के तौर पर काम कर रहा था. उस पर ऐसे आपूर्ति आधारित डीएमएफ कार्यों की पहचान करने, जिनमें अधिक कमीशन की संभावना हो, उन्हें चयनित आपूर्तिकर्ताओं में प्रतिशत के आधार पर बांटने, काम के आदेश और भुगतान जारी करवाने, आपूर्तिकर्ताओं से कमीशन एकत्र करने तथा उसे सिंडिकेट के सदस्यों के बीच बांटने में भूमिका निभाने का आरोप है.
ईडी ने इस मामले में इससे पहले 3 और 4 सितंबर 2025 को पीएमएलए की धारा 17(1) के तहत तलाशी अभियान चलाया था. इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे.
करीब 31 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप
ईडी ने बैंक खातों के लेनदेन और पीएमएलए की धाराओं 17 और 50 के तहत दर्ज बयानों के विश्लेषण के आधार पर दावा किया है कि सतपाल सिंह छाबड़ा को करीब 31 करोड़ रुपये का अवैध कमीशन प्राप्त हुआ. एजेंसी के अनुसार यह राशि अपराध से अर्जित आय यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम है. यह रकम आरोपी, उसके परिवार के सदस्यों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) और उसके नियंत्रण वाली संस्थाओं के खातों में प्राप्त होने की बात कही गई है.
