राजनांदगांव.12 लाख रुपए देकर 43 लाख रुपए के सौदे की जमीन की रजिस्ट्री कर लेने का मामला सामने आया है. शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. घटना की जांच की जा रही है. छुरिया पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता प्रवीर मोहन सिंह ने इंदिरा नगर राजनांदगांव निवासी मोहम्मद परवेज गोरी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.
आरोप है कि 1.15 एकड़ जमीन का 43 लाख रुपए में सौदा करने के बाद खरीददार ने कथित तौर पर महज 12 लाख रुपए का भुगतान किया और 0.35-0.35 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री कराने की बात कहकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए. बाद में जब पटवारी रिकॉर्ड की जांच हुई तो पता चला कि खसरा नंबर 599/5 की पूरी 1.295 हेक्टेयर भूमि ही खरीदार के नाम दर्ज हो चुकी है.
शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त भूमि उसकी माता बिमला देवी राजपूत, भाई नवीन मोहन सिंह, बहन पूर्वा परिहार सहित अन्य के नाम शामिलात में दर्ज थी. 19 मई 2026 को 1.15 एकड़ जमीन का सौदा 43 लाख रुपए में हुआ था. सौदे के दौरान पांच लाख रुपए दो चेक के माध्यम से बतौर बयाना दिए गए थे और छह माह के भीतर शेष 38 लाख रुपए का भुगतान कर रजिस्ट्री कराने की बात तय हुई थी. शिकायत के मुताबिक 27 जुलाई को सभी को पंजीयन कार्यालय बुलाया गया. वहां 0.35 एकड़ भूमि की रजिस्ट्री कराने की बात कहकर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करा लिए गए. इसके बाद 29 जुलाई को पंजीयन कराया गया. इसी तरह 30 जुलाई को फिर 0.35 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री की बात कही गई और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिसका पंजीयन 3 अगस्त को कराया गया.
मामले का खुलासा 6 अगस्त को हुआ, जब खेत में अधिया पर खेती करने वाले मुकुंद सिंह ने शिकायतकर्ता को बताया कि पटवारी रिकॉर्ड में पूरी जमीन खरीदार के नाम दर्ज हो गई है. इसके बाद शिकायतकर्ता ने खरीदार से संपर्क किया.शिकायतकर्ता का आरोप है कि मोहम्मद परवेज गोरी ने पूरी जमीन की रजिस्ट्री होने की बात स्वीकार करते हुए इसे अर्जीनवीस की गलती बताया और वापसी बयनामा कराने का आश्वासन दिया. 11 अगस्त को भी कथित तौर पर दुर्ग पहुंचकर पुलिस कार्रवाई नहीं करने और जल्द जमीन वापस करने की बात कही गई. लेकिन अगले ही दिन ग्रामीणों से शिकायतकर्ता को जानकारी मिली कि आरोपित जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की तैयारी में है और लोगों को भूमि दिखाई जा रही है.
शिकायत में आरोप यह भी है कि 43 लाख रुपए में सौदा होने के बावजूद अब तक केवल 12 लाख रुपए का भुगतान किया गया है. इसके बावजूद पूरी 1.295 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री करा ली गई. शिकायतकर्ता ने पुलिस से पंजीयन दस्तावेजों, भुगतान के रिकॉर्ड और पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया की जांच कराने तथा धोखाधड़ी के आरोप में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. पुलिस जांच के बाद ही दस्तावेजों में हुई वास्तविक प्रक्रिया और लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट होगी.
