CG News: छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा का परिणाम बेहतर करने के लिए छात्रों पर उनकी पसंद के विषय बदलने का दबाव बनाने का मामला सामने आया है. प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर शिकायत की है. एसोसिएशन का आरोप है कि कुछ सरकारी स्कूलों में छात्रों को 9वीं और 11वीं में अंग्रेजी विषय लेने से रोका जा रहा है और इसके बजाय बैंकिंग-फाइनेंस जैसे विषय चुनने के लिए कहा जा रहा है.
खराब रिजल्ट के दबाव में विषय बदलने का आरोप
एसोसिएशन के मुताबिक, 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में कमजोर परिणाम आने पर सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों पर कार्रवाई और तबादले किए जा रहे हैं. इसके चलते स्कूलों में रिजल्ट सुधारने का दबाव बना हुआ है. आरोप है कि इसी दबाव के कारण अंग्रेजी में कम अंक आने की आशंका को देखते हुए कुछ विद्यार्थियों को यह विषय लेने से रोका जा रहा है.
अंग्रेजी विषय नहीं होने से आगे की पढ़ाई पर असर
एसोसिएशन ने पत्र में कहा है कि 12वीं में अंग्रेजी विषय नहीं होने से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में परेशानी हो सकती है. नर्सिंग और फार्मेसी जैसे कई पाठ्यक्रमों में 12वीं स्तर पर अंग्रेजी विषय की आवश्यकता होती है. ऐसे में विषय बदलने के कारण सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए आगे इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के अवसर प्रभावित हो सकते हैं.
गरीब परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा ज्यादा असर
एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं. यदि उन्हें अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने का अवसर नहीं मिलता है, तो इसका असर उनकी आगे की पढ़ाई और करियर पर पड़ सकता है. एसोसिएशन ने कहा कि केवल स्कूल का बोर्ड परिणाम बेहतर दिखाने के लिए विद्यार्थियों की विषय पसंद बदलना उचित नहीं है.
रुचि के अनुसार विषय चुनने का मौका देने की मांग
एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री से मांग की है कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को उनकी रुचि और भविष्य की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए विषय चुनने की स्वतंत्रता दी जाए. इसके साथ ही अंग्रेजी विषय लेने से रोकने या दूसरे विषय चुनने के लिए दबाव बनाने से जुड़ी शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाए.
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