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अपनों से बिछड़े रिश्तों को गरिमा गृह में मिला नया मंच: ट्रांसजेंडर समुदाय ने भाइयों की कलाई पर सजाई राखी, पहुंचे नवनियुक्त पुलिस आरक्षक

Rakshabandhan 2026: रायपुर. त्योहारों की चमक अक्सर अपनों के बीच और परिवार के साये में पूरी होती है, लेकिन समाज के उस वर्ग के लिए जिसकी दुनिया कभी उपेक्षा और दूरियों के अंधेरे में सिमटी थी, रायपुर का ‘गरिमा गृह’ इस बार उम्मीद और आत्मीयता का नया संबल बन गया. सरोना स्थित ट्रांसजेंडर शेल्टर होम में रक्षाबंधन का पर्व महज़ एक रस्म नहीं, बल्कि उस दर्द पर मरहम साबित हुआ जो अपनों से बिछड़ने के बाद अक्सर भीतर तक टीस देता है.

इस अनूठे आयोजन का सबसे मार्मिक और भावुक पल तब आया जब ट्रांस महिला निक्की ध्रुव ने अपने भाई स्पर्श कश्यप की कलाई पर स्नेह की डोर बांधी. बहन के हाथों की राखी और भाई की आँखों में चमकता अपनत्व, वहां मौजूद हर शख्स के दिल को छू गया. सिर्फ एक रिश्ते की औपचारिकता से परे, शेल्टर होम के भीतर समुदाय के अन्य सदस्यों ने भी एक-दूसरे की कलाई पर राखी सजाकर यह साबित कर दिया कि प्यार और रक्षा का संकल्प किसी पारंपरिक दायरे का मोहताज नहीं होता. खुशियों के इस कारवां में चार चांद तब लग गए जब छत्तीसगढ़ में हाल ही में नवनियुक्त हुए ट्रांसजेंडर आरक्षक भी इस जश्न का हिस्सा बनने सरोना पहुंचे. पुलिस की वर्दी में पहुंचे इन साथियों की मौजूदगी ने समुदाय के भीतर एक अलग ही आत्मविश्वास और सुरक्षा का भाव जगाया.

समाज की दूरी के बीच उम्मीद की एक किरण (Rakshabandhan 2026)

पोपी देवनाथ कहती हैं कि रक्षाबंधन हमारे लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के उस प्यार और अपनत्व को महसूस करने का दिन है जो समाज कई बार हमसे छीन लेता है. गरिमा गृह आज हमारे लिए किसी पक्के परिवार के आशियाने जैसा है. वहीं विद्या राजपूत ने इस पहल पर अपने दिल की बात रखते हुए साझा किया, हममें से कितनों के ही जीवन में परिवार और भाई-बहनों से दूरियों का एक लंबा सफर रहा है, लेकिन भीतर का प्रेम कभी कम नहीं होता. यहाँ इस पर्व को मनाना उसी खोए हुए अपनेपन को फिर से जीने जैसा खूबसूरत एहसास है. सरोना के इस शेल्टर होम में सजी राखियां और गूंजती हंसी इस बात की तस्दीक कर गई कि रिश्ते खून के पहचान से परे, सिर्फ संवेदनाओं और साथ से गढ़े जाते हैं.

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