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Raipur: IPS अधिकारी बनकर किराना दुकानदार को ठगा, 44 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट, ठगे 8.50 लाख

Gwalior Cyber Fraud

फाइल फोटो

Raipur Cyber Thagi: रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है. यहां के उरकुरा बजरंग नगर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. हैरानी कि बात तो यह है कि, ठगों ने खुद को सीबीआई और आईपीएस अधिकारी बताकर 64 वर्षीय किराना दुकानदार को 44 दिन तक डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा और 8.50 लाख रुपये ठग लिए. रकम जुटाने के लिए पीड़ित को अपनी जमा-पूंजी के साथ सोने के जेवर तक बेचने पड़े.

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, पीड़ित देवसिंह साहू ने बताया कि 18 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे एक महिला ने उन्हें फोन किया. उसने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताते हुए आदित्य नाम के व्यक्ति से बात कराई. आदित्य ने परिवार, जमीन और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी ली. इसके बाद बलराज सिंह नाम के व्यक्ति ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पूछताछ शुरू की. कुछ देर बाद वीडियो कॉल पर प्रदीप सिंह से बात कराई गई, जिसने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया.

मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर ठगी

प्रदीप ने देवसिंह को बताया कि उनके नाम से आईसीआईसीआई बैंक में 6.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और उनका नाम इस केस में है. आरोपियों ने कहा कि रकम का मिलान करने के लिए उन्हें अपने खाते से पैसे जमा करने होंगे. ऐसा नहीं करने पर सीबीआई की कार्रवाई और परिवार को गिरफ्तार कर उठा ले जाने की धमकी दी गई.

ठगों ने लूटे 8.50 लाख

जानकारी के मुताबिक, ठगों ने बुजुर्ग को इस कदर डरा दिया कि वे हर घंटे वीडियो कॉल पर अपडेट देने लगे. देवसिंह और उनकी पत्नी इंदु साहू को लगातार वीडियो कॉल पर सामने बैठे रहने के लिए कहा जाता था. 44 दिन तक दोनों पति-पत्नी इसी डर में रहे.4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच देवसिंह ने फोन-पे के जरिए 9 बार में कुल 8.50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए.

रिद्धिमा ऑटो और राकेश ट्रेडर्स के खातों में दो-दो लाख रुपये, यूको बैंक में एक लाख, कैपवाइज ट्रेडिंग टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. में एक लाख, कोटक महिंद्रा बैंक में 50 हजार, गणेश भंडार में एक लाख और सृजन लाइफ मैनेजमेंट के खाते में एक लाख रुपये भेजे गए.

छोटे भाई को बताया

लगातार पैसों की मांग से परेशान होकर 3 अक्टूबर को देवसिंह ने अपने छोटे भाई सुंदर लाल साहू को पूरी बात बताई. भाई ने उन्हें साइबर ठगी की जानकारी दी. इसके बाद 4 अक्टूबर को उन्होंने खमतराई थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस को बैंक स्टेटमेंट, चैट, मैसेज और ट्रांजेक्शन की रसीदें भी सौंपी गई हैं. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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