Vistaar Health Conclave: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में विस्तार न्यूज़ ने हेल्थ कॉन्क्लेव का आयोजन किया है. कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में डिप्टी सीएम से लेकर स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा क्षेत्र की तमाम बड़ी हस्तियों ने शिरकत की. इस दौरान छ्त्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्ची की गई. कार्यक्रम में रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के MD संदीप दवे भी पहुंचे. विस्तार न्यूज़ के एडिटर इन चीफ ज्ञानेंद्र तिवारी ने रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के एमडी डॉक्टर संदीप दवे से बात की. इस दौरान डॉक्टर दवे ने स्वास्थ्य से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर बात की.
सवाल- 1700 की भर्ती और 1400 पर क्यों खाली?
जवाब: डॉ. संदीप दवे ने बताया कि ऐसा नहीं है कि राज्य में डॉक्टर्स की कमी है. छ्त्तीसगढ़ में डॉक्टर बहुत बन रहे हैं, लेकिन कोई सरकारी डॉक्टर नहीं बनना चाहते है. इसमें पहला बड़ा कारण कम सैलरी है. सरकारी अस्पतालों में सैलरी कम मिलती है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में सैलरी ज्यादा है. इसके अलावा दूरस्थ इलाकों में जहां सरकारी अस्पताल होते हैं, वहां सुविधाओं का अभाव होता है. जिसके कारण डॉक्टर्स को परिवार के साथ रहने में परेशानी होती है. उन्हें परिवार के लिए ढंग का मकान नहीं मिलता और आसपास काफी दूर तक बच्चों के लिए स्कूल भी नहीं मिलते हैं. इस कारण डॉक्टर सरकारी अस्पततालों में नौकरी नहीं करना चाहते हैं.
सवाल: डॉक्टर्स की कमी कैसे पूरी होगी?
जवाब: बस्तर में सरकार ने इंसेंटिव दिया, देखिए डॉक्टर आ गए है. सरकार की मंशा भी डॉक्टर्स की कमी पूरी करने की है. लेकिन धन की शायद पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. दूरस्थ इलाकों में सुविधाएं बढ़ेंगी तो यकीनन सरकारी अस्पतालों खासकर ग्रामीण इलाकों में डॉक्टर्स की संख्या बढ़ेगी.
सवाल: लोग इलाज करवाने बाहर क्यों जाते हैं?
जवाब: लोग अपने ईगो को सेटिस्फाई करने के लिए बाहर जाते हैं. अब अगर किसी के पास ज्यादा हैं, तो वह विदेश में भी जाकर इलाज करवा सकता है. रायपुर में प्राइवेट सेक्टर में अच्छा हो रहा है. डीके अस्पताल में न्यूरो सर्जरी एक विभाग है. अच्छे स्पेशलिस्ट हैं और ज्यादा काम हो रहा है. यहां कई एक्सपर्ट्स हैं. किसी को बाहर जाने की जरूरत नहीं है. जल्द ही रायपुर दूसरे बड़े शहर बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद जैसे शहरों की फेहरिस्त में शामिल होगा.
सवाल: जगदलपुर के अस्पताल में आउटसोर्स क्यों करना पड़ा?
जवाब: ऐसा नहीं है कि सरकार ने अच्छे अस्पताल नहीं बनवाए हैं. कई अच्छे अस्पताल होने के साथ ही उपकरण भी हैं. लेकिन अस्पताल उपकरणों से नहीं चलता है. इसके लिए अच्छे डॉक्टर्स और टेक्निशियन का होना जरूरी है. इस कारण हैदराबाद की प्राइवेट कंपनी को आउटसोर्स करना पड़ गया.
सवाल: 4-5 मेडिकल कॉलेज को मान्यता क्यों नहीं मिली?
जवाब: मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए एनाउंस करना बहुत आसान है. एमसीआई की जो रिक्वायरमेंट है, वो हम हर जगह पर पूरी नहीं कर पा रहे हैं. कम से कम 300 बेड का अस्पताल होना चाहिए. उम्मीद है कि कवर्धा में मेडिकल कॉलजे को मंजूरी मिल जाएगी. यहां पर पर्याप्त संसाधन हैं.
सवाल: PHC, CHC की अभी क्या स्थिति है?
जवाब: ग्रामीण इलाकों में तेजी से काम हो रहा है. कई ग्रामीण इलाकों में प्राइवेट सेक्टर ने तेजी से काम किया है. कटघोरा जैसी जगह पर बसना में 150 बिस्तर का अस्पताल खुला हुआ है. सरकारी अस्पताल भी काफी खुले हैं, जहां उपकरण भी मौजूद हैं. लेकिन सरकारी अस्पतालों में एक्सपर्ट्स की कमी है. अगर डॉक्टर्स को अच्छी सैलरी और सुविधाएं दी जाएं तो स्थिति बेहतर हो सकती है.
