Ambikapur: मांझी जनजाति के परिवार की जमीन पर दबंगों का कब्जा, 2 साल से लगा रहे दफ्तरों के चक्कर, नहीं मिल रहा न्याय
माझी जनजाति परिवार
Ambikapur: सरगुजा जिले के मैनपाट के ग्राम पंचायत कुनिया में रहने वाले माझी जनजाति परिवार के लोगों की जमीन पर दबंग लोगों ने कब्जा कर लिया है. माझी जनजाति के लोग पिछले दो सालों से लगातार जिला स्तर पर लगने वाले जनदर्शन में पहुंचकर शिकायत कर रहे हैं लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि जनजाति परिवारों को वन अधिकार अधिनियम के तहत जमीन का पट्टा जारी किया गया है.
मांझी जनजाति के परिवार की जमीन पर दबंगों का कब्जा
जनजाति परिवार के लोग आज इसी शिकायत के साथ कलेक्टर से मिलने के लिए पहुंचे थे. उन्होंने कलेक्टर को जनदर्शन में आवेदन दिया और जमीन वापस दिलाने की मांग की. मांझी जनजाति परिवार के लोगों का कहना है कि कई पीढियों से वे उसे जमीन पर खेती-बाड़ी कर रहे थे और उस जमीन का उन्हें वन अधिकार अधिनियम के तहत पट्टा भी जारी किया गया है, लेकिन गांव के ही दबंग लोगों के द्वारा मारपीट करते हुए कब्जा कर लिया गया है, जब वे जमीन को खाली करने के लिए कहते हैं तब उनके साथ विवाद किया जाता है और धमकाया जाता है इसके कारण उनकी जमीन उन्हें वापस नहीं मिल पा रही है.
2 साल से लगा रहे दफ्तरों के चक्कर, नहीं मिल रहा न्याय
हैरानी की बात तो यह है कि पूरा मामला तहसील न्यायालय में भी चला लेकिन वहां भी न्याय नहीं मिल सकता है और यही कारण है कि माझी परिवार सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं. कुनिया ग्राम पंचायत के फागु और मुन्नाराम माझी ने कलेक्टर को आवेदन दिया है. आवेदन में कहा है कि उनकी जमीन पर गांव के राम पुकार यादव, नरेश यादव और अनुप यादव के द्वारा कब्जा कर लिया गया है. पट्टे की जमीन के अलावा गोचर मद की जमीन पर भी कब्जा किया गया है.
गोचर मद की जमीन यानी मवेशियों की चरागाह की जमीन होती है. जहां गांव के मवेशी आकर रहते हैं और घास-फूस खाते हैं. मैनपाट में सरकारी जमीन और मांझी जनजाति परिवार के लोगों की जमीन पर इस तरीके से कब्जे के दर्जनों मामले हैं लेकिन इन मामलों में त्वरित गति से सुनवाई नहीं होने के कारण कई मामले सालों से पेंडिंग पड़े हुए हैं वहीं दबंग लोग राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिली भगत से दस्तावेजों में भी छेड़छाड़ कर रहे हैं जिसकी वजह से गरीब आदिवासियों को उनका जमीन का हक नहीं मिल पा रहा है.