अंबिकापुर के निजी अस्पतालों में पार्किंग व्यवस्था नदारद, सड़कों पर घंटों तक लग रहा जाम, NOC को लेकर नगर निगम पर उठे सवाल
अंबिकापुर: निजी अस्पतालों में पार्किंग की व्यवस्था ना होने से सड़कों पर बनी जाम की स्थिति
Ambikapur News: अंबिकापुर शहर में संचालित कई निजी अस्पतालों की पार्किंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि नगर निगम ने बिना भौतिक सत्यापन किए ही अस्पतालों को पार्किंग संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया, जिसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने नर्सिंग होम का लाइसेंस दे दिया. इसका खामियाजा अब शहर की जनता को रोजाना ट्रैफिक जाम के रूप में भुगतना पड़ रहा है.
सड़कों पर बन रही जाम की स्थिति
शहर के कई निजी अस्पताल मुख्य सड़कों से लगे हुए हैं, लेकिन वहां मरीजों और उनके परिजनों के वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं है. मजबूरी में वाहन सड़क किनारे खड़े किए जाते हैं, जिससे कई जगह घंटों जाम की स्थिति बन जाती है. कई बार तो मरीजों को लेकर पहुंचने वाली एम्बुलेंस भी इसी जाम में फंस जाती हैं, जिससे आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होती हैं.
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने के लिए नगर निगम से पार्किंग सहित अन्य मानकों पर NOC ली जाती है. आरोप है कि कई अस्पतालों ने कागजों में पार्किंग की व्यवस्था दर्शा दी, जबकि मौके पर पर्याप्त पार्किंग उपलब्ध नहीं है. इसके बावजूद नगर निगम के राजस्व विभाग ने कथित तौर पर बिना भौतिक सत्यापन के ही NOC जारी कर दी.
हैरानी की बात यह है कि वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है, लेकिन न तो नगर निगम ने ऐसे मामलों की दोबारा जांच की और न ही नियमों के विपरीत जारी NOC को निरस्त करने की कोई कार्रवाई की गई.
इससे नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
पार्किंग व्यवस्था ना होने से बिगड़ी स्थिति
अंबिकापुर के पैलेस रोड स्थित निजी अस्पतालों के अलावा गुदरी बाजार समीप अस्पताल और CMHO दफ्तर वाली सड़क के निजी अस्पताल, लैब संचालको ने पार्किंग व्यवस्था नहीं दी है. इसकी वजह से अस्पताल और लैब के बाहर गाड़ियां ख़डी रहती है और इसके बाद सड़क किनारे गाड़ियों की लंबी कतार से ट्रैफिक व्यस्था बिगड रहीं है.
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
इस पूरे मामले में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा ने कहा कि अस्पतालों को लाइसेंस संबंधित विभागों से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर जारी किया जाता है. वहीं नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि बिना सत्यापन के NOC जारी किए जाने की शिकायत सही पाई जाती है तो इसकी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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अब बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पतालों के लिए पार्किंग व्यवस्था अनिवार्य है, तो बिना वास्तविक जांच के NOC कैसे जारी हुई? और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित अस्पतालों पर कार्रवाई कब होगी? फिलहाल शहरवासी ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था की परेशानी झेलने को मजबूर हैं.