CG News: झीरम घाटी हत्याकांड में NIA की विशेष अदालत द्वारा 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच और फैसले को लेकर कई सवाल उठाए हैं. अदालत ने 16 सितंबर 2026 को 2013 के झीरम घाटी हमले के मामले में 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया है.
वहीं अंबिकापुर पहुंचे भूपेश बघेल ने कहा कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन पीड़ित परिवारों के साथ पूरा न्याय नहीं हुआ है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच एजेंसी के मुताबिक हमले में बड़ी संख्या में नक्सली शामिल थे, तो मामले में सिर्फ 10 लोगों को ही सजा क्यों हुई.
बड़े नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं – बघेल
भूपेश बघेल ने दावा किया कि NIA खुद करीब 200 नक्सलियों की मौजूदगी की बात कहती रही है, लेकिन बड़े नक्सली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि FIR में जिन बड़े नक्सली नेताओं के नाम होने की बात सामने आई, उन्हें सजा क्यों नहीं हुई और एक भी बड़े नक्सली नेता को इस मामले में सजा नहीं मिली।.
पूर्व मुख्यमंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए. उनका कहना था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सुरक्षा में चूक की बात स्वीकार की थी, लेकिन NIA ने किसी सुरक्षा कर्मी से पूछताछ नहीं की और न ही एक कांस्टेबल को सजा हुई. बघेल ने इसे जांच पर सवाल उठाने वाला पहलू बताया.
NIA सवालों के घेरे में है – भूपेश बघेल
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि झीरम घाटी मामले की पूरी साजिश सामने नहीं आई है और NIA भी सवालों के घेरे में है. बघेल ने सवाल उठाया कि आखिर किसके इशारे पर बड़े नक्सली नेताओं के नाम हटाए गए.
बघेल ने यह भी कहा कि जो नक्सली बाद में सरेंडर कर जेल में हैं, उनके बयान तक नहीं लिए गए. उनके मुताबिक, जब तक हमले की पूरी साजिश और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने नहीं आती, तब तक पीड़ित परिवारों को पूर्ण न्याय मिलने का सवाल बना रहेगा.
साल 2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी मामले में 25 मई 2013 को हुए हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी. करीब 13 साल बाद विशेष NIA अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया है.
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