इनपुट – मदन तिवारी
CG News: छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के भरतपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत शेरी के आश्रित ग्राम उचेहरा में इन दिनों भालुओं का अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है. उचेहरा के राजा माड़ा में बनी एक कुटिया में प्रतिदिन शाम करीब 4 बजे जंगल से भालू पहुंचते हैं और यहां साधु रामदास द्वारा उन्हें प्रसाद खिलाया जाता है.
कई वर्षों से जारी है भालुओं के आने का सिलसिला
बताया जाता है कि भालुओं के कुटिया तक पहुंचने और प्रसाद खाने का यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से लगातार चला आ रहा है. भालू प्रसाद खाने के बाद बिना किसी को नुकसान पहुंचाए वापस जंगल की ओर चले जाते हैं. कई बार यहां 4 से 5 भालू एक साथ पहुंचते हैं, जबकि आज सामने आई तस्वीरों में दो भालू कुटिया में प्रसाद खाते हुए नजर आ रहे हैं.
साधु रामदास ‘भगवान’ और ‘राम’ कहकर बुलाते हैं
साधु रामदास इन भालुओं को ‘भगवान’ और ‘राम’ कहकर संबोधित करते हैं. भालुओं को प्रसाद खाते देखने के लिए आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज के इलाकों से भी लोग राजा माड़ा स्थित इस कुटिया में पहुंचते हैं. जनकपुर मुख्यालय से यह स्थान करीब 17 किलोमीटर दूर बताया गया है.
भालुओं को देखने पहुंचते हैं दूर-दराज से लोग
भालुओं का रोजाना इस तरह जंगल से निकलकर कुटिया तक पहुंचना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले लोग भी इस अनोखे नजारे को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं. कई लोगों के लिए भालुओं का साधु रामदास के पास आना और प्रसाद ग्रहण करना आस्था से भी जुड़ा हुआ है.
वन्यजीवों और ग्रामीणों की सुरक्षा जरूरी
हालांकि, जंगली भालुओं और लोगों के बीच इस तरह की नजदीकी को देखते हुए वन विभाग को पूरे मामले पर निगरानी रखनी चाहिए. भालू जंगली और शक्तिशाली वन्यजीव हैं, इसलिए उनके व्यवहार में अचानक बदलाव होने की स्थिति में लोगों के लिए खतरा पैदा हो सकता है. ऐसे में वन विभाग की निगरानी और आवश्यक सावधानियों के जरिए वन्यजीवों के साथ-साथ ग्रामीणों और यहां पहुंचने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए.
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