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Ambikapur News: खुले आसमान के नीचे विराजमान नाथल दाई, अब बनेगा मंदिर, मजार को लेकर भी विवाद

Ranpur Nathal Dai Temple

रनपुर नाथल दाई मंदिर

Ambikapur News: शहर से लगे रनपुर तकिया गांव में नाथल दाई की प्रतिमा वर्षों से खुले आसमान के नीचे विराजमान है. अब यहां मंदिर निर्माण की तैयारी की जा रही है. मंदिर के लिए पांच लाख रुपये स्वीकृत होने और भूमिपूजन किए जाने की जानकारी स्थानीय निवासी अनुज दुबे ने दी है. हालांकि, मंदिर निर्माण के साथ ही मजार को लेकर भी विवाद सामने आने लगा है. दोनों पक्षों के दावों के बीच यह मामला चर्चा में है.

मनोकामना पूरी होने की मान्यता

रनपुर स्थित नाथल दाई के प्रति स्थानीय लोगों की गहरी आस्था है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है. स्थल पर बलि प्रथा भी प्रचलित होने की बात कही जाती है. इस वर्ष नवरात्रि के दौरान पहली बार यहां नौ दिनों के लिए मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई.

नाथल दाई का यह स्थल अंजुमन कमेटी द्वारा संचालित मजार के पास स्थित है. स्थानीय स्तर पर गांव को सद्भावना गांव के रूप में भी जाना जाता है. अब मंदिर निर्माण की योजना के साथ इस धार्मिक स्थल को विकसित करने की तैयारी की जा रही है.

मंदिर निर्माण के लिए पांच लाख रुपये स्वीकृत होने का दावा

स्थानीय निवासी के अनुसार, नाथल दाई मंदिर निर्माण के लिए सरकार की ओर से पांच लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं और भूमिपूजन भी हो चुका है. उन्होंने यहां नाथल दाई कॉरिडोर बनाने की योजना की भी जानकारी दी.

हालांकि, मंदिर निर्माण को लेकर कानूनी विवाद सामने आने की बात कही जा रही है. हिंदू समाज के लोगों का दावा है कि दूसरे समुदाय के कुछ लोग मंदिर निर्माण के विरोध में अदालत गए हैं. उनका कहना है कि वे मंदिर निर्माण के लिए कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे.

भजन बजाने को लेकर भी विवाद का आरोप

स्थानीय लोगों ने नवरात्रि के दौरान धार्मिक गतिविधियों को लेकर भी विवाद होने का आरोप लगाया है. अनुज दुबे के अनुसार, इस वर्ष दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने के बाद भजन बजाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा. उनका आरोप है कि दूसरे समुदाय के लोगों ने कम आवाज में भी भजन बजाने पर आपत्ति जताई. इन आरोपों पर दूसरे पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.

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मजार को लेकर उठे सवाल

मंदिर निर्माण के विवाद के बीच मजार को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. हिंदू नेता जन्मेजय मिश्रा ने आरोप लगाया है कि मजार के नीचे दफन व्यक्ति पहाड़ी कोरवा जनजाति का था. उनका दावा है कि संबंधित व्यक्ति के परिवार की अशिक्षा और जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर वहां चादर चढ़ाने की परंपरा शुरू की गई. उन्होंने मजार के नीचे दफन व्यक्ति की पहचान स्पष्ट करने के लिए डीएनए जांच कराने की बात भी कही है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. संबंधित व्यक्ति की पहचान, मजार के इतिहास और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

फिलहाल, रनपुर में नाथल दाई मंदिर निर्माण की तैयारी के बीच धार्मिक स्थल और मजार को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है. मामले में प्रशासनिक पहल, कानूनी स्थिति और दोनों पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी.

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