Vistaar NEWS

Surguja News: तारा कोल माइंस का विरोध, आंदोलन की राह पर सरगुजा विकास संघर्ष समिति

Hasdeo Aranya

हसदेव जंगल

Hasdeo Aranya: सरगुजा जिले में प्रस्तावित तारा कोल माइंस को लेकर विरोध शुरू हो गया है. सरगुजा विकास संघर्ष समिति के सामाजिक कार्यकर्ता सुजान बिंद और सुरेश राम बुनकर ने सरगुजा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तारा कोल माइंस की प्रक्रिया पर रोक लगाने, खनन के लिए पेड़ों की कटाई की अनुमति नहीं देने और अडानी कंपनी से जुड़े CSR कार्यों की जांच कर कार्रवाई की मांग की है.

ज्ञापन में सुजान बिंद ने दावा किया है कि तारा कोल माइंस के लिए सरकार की ओर से प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है और यह खदान अडानी समूह से संबद्ध CG Syn-Gas & Chemicals Limited को दिए जाने की तैयारी है.

हसदेव क्षेत्र में खनन का विरोध

उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में खनन शुरू होने पर 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई की आशंका है. उनका कहना है कि क्षेत्र में पुराने और घने जंगल हैं, जिनकी कटाई से पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. सामाजिक कार्यकर्ता ने तारा क्षेत्र को हसदेव क्षेत्र और जंगली हाथियों के विचरण क्षेत्र का हिस्सा बताते हुए कहा कि खनन शुरू होने से हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों के आवास पर असर पड़ सकता है. साथ ही जंगल से निकलने वाले छोटे नाले, जो स्थानीय नदियों के सहायक हैं, उनके अस्तित्व पर भी खतरा पैदा होने की आशंका जताई गई है.

अडानी के विकास दावों पर सवाल

ज्ञापन में परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोल माइंस का उल्लेख करते हुए अडानी के CSR और विकास कार्यों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. बिंद का आरोप है कि कंपनी द्वारा पूर्व में अस्पताल, इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलिटेक्निक कॉलेज सहित कई विकास कार्यों के दावे किए गए थे, लेकिन इनमें से कई दावे जमीन पर पूरे नहीं हुए. उन्होंने प्रभावित क्षेत्र में अडानी फाउंडेशन द्वारा महिलाओं के लिए चलाए जा रहे हल्दी पाउडर, सैनिटरी पैड, जैविक खाद और डेयरी जैसे रोजगार संबंधी उपक्रमों की भी जांच की मांग की है.

ये भी पढ़ें- Ambikapur: सरकारी अस्पताल में टाइफाइड की जांच नहीं, लेना पड़ता है प्राइवेट लैब का सहारा, मरीज परेशान

कार्रवाई न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन में कहा गया है कि मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा. सुजान बिंद ने कहा है कि ज्ञापन देने के बाद अगर इस पर कार्यवाही नहीं होती है तो आने वाले दिनों में कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा और इसके बाद भी अगर प्रशासन कार्यवाही नहीं करता है तो प्रभावित गांवों में जाकर लोगों के साथ मिलकर और भी बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा.

Exit mobile version