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CG News: सरगुजा संभाग में खुलेआम लकड़ी तस्करी, आजम खान सहित तीन के खिलाफ FIR

सरगुजा संभाग में खुलेआम लकड़ी तस्करी

सरगुजा संभाग में खुलेआम लकड़ी तस्करी

CG News: सरगुजा संभाग में एक साल से यूपी के लकड़ी माफिया सक्रिय हैं. माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है यही वजह है कि इनके खिलाफ कार्यवाही नहीं हो पा रही है. अब इस पूरे मामले में सूरजपुर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने बड़ा खुलासा किया है, खुलासा तब हुआ जब लकड़ी तस्कर सूरजपुर एसडीएम का फर्जी हस्ताक्षर और सील लगाकर पेड़ कटाई का अनुज्ञा प्रमाण पत्र के माध्यम से लकड़ी की तस्करी कर रहे थे. इस पूरे मामले में सूरजपुर की एसडीएम शिवानी जायसवाल ने पुलिस में आवेदन देते हुए अपराध दर्ज करने का आदेश दिया, इसके बाद पुलिस ने लकड़ी तस्कर आजम खान सहित तीन लोगों के खिलाफ आधा दर्जन धाराओं में एफआईआर दर्ज किया है.

SDM के निर्देश के बाद लकड़ी माफियाओं पर गिरी गाज

अनुविभागीय अधिकारी सूरजपुर शिवानी जायसवाल के दफ्तर में कार्यरत लिपिक ने एसडीएम के निर्देश के बाद लकड़ी माफिया आजम खान के विरुद्ध अपराध दर्ज कराया है आजम खान के अलावा अन्य दो लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई गई है जिसमें ट्रक का चालक और एक अन्य व्यक्ति भी शामिल है. जानकारी के मुताबिक ट्रक में 15 टन यूकेलिप्टस का लकड़ी लौटकर उसे रायपुर के खरोरा स्थित प्लाईवुड फैक्ट्री में ले जाया जा रहा था लेकिन रास्ते में रामानुजनगर क्षेत्र में जब ट्रक की जांच की गई.

फर्जी तरीके से अनुज्ञा पत्र तैयार कराया गया

तब ट्रक के चालक के द्वारा पेड़ कटाई से संबंधित अनुज्ञा प्रमाण पत्र दिखाया गया जिसमें सूरजपुर एसडीम शिवानी जायसवाल का हस्ताक्षर और सील लगा हुआ था लेकिन प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होने पर इसकी जांच कराई गई तब पता चला कि लकड़ी माफिया के द्वारा फर्जी तरीके से अनुज्ञा पत्र तैयार कराया गया है. इस पर पूरे मामले की जांच हुई और फिर थाने में आजम खान, बृजनारायण साहू और राजेश यादव के विरुद्ध कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में केस दर्ज कराया गया है.

पिछले 1 साल से लकड़ी माफिया कर रहे काम

पिछले 1 साल से लकड़ी माफिया सरगुजा संभाग के सभी जिलों में अवैध तरीके से लकड़ी डिपो स्थापित कर लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं. गांव में किसानों से यूकेलिप्टस के अलावा कई दूसरे प्रजाति के पेड़ों को गैरकानूनी तरीके से खरीदी कर रहे हैं. उसके बाद अवैध तरीके से उसकी कटाई कर अपने लकड़ी डिपो में ले जाकर डंप करते हैं और फिर रायपुर, उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे इलाकों में ले जाकर फैक्ट्री में बेच रहे हैं.

नीलगिरी लकड़ी के आड़ में इमारती लकड़ी की तस्करी

नीलगिरी लकड़ी के आड़ में इमारती लकड़ी की तस्करी भी की जा रही है लेकिन राजनीतिक संरक्षण के कारण वन विभाग और पुलिस प्रशासन के बड़े अधिकारी भी इस पूरे मामले में हाथ नहीं डाल रहे हैं. कभी-कभार पुलिस के कुछ अधिकारी जिन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती है कि इस पूरे गैंग को राजनीतिक संरक्षण है उनके द्वारा कार्यवाही शुरू की जाती है तब बड़े नेताओं के फोन आने लगते हैं और फिर उन्हें कार्यवाही अधूरी छोड़नी पड़ती है.

दिनदहाड़े खुलेआम फर्जी दस्तावेज

यही वजह है कि लकड़ी माफिया दिनदहाड़े खुलेआम फर्जी दस्तावेज के आधार पर पेड़ों की कटाई और उसकी ट्रांसपोर्टिंग कर रहे हैं तो स्थानीय लोग अगर विरोध करते हैं तो उन्हें धमकियां दी जाती हैं. बताया जाता है कि राजनीतिक संरक्षण इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि इस पूरे गिरोह के द्वारा जो कमाई किया जा रहा है उसका एक बड़ा हिस्सा नेताओं तक पहुंचाया जा रहा है.

सूत्रों का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार में अब तक सैकड़ों ट्रक नीलगिरी और दूसरे प्रजाति के लकड़ियों की तस्करी की जा चुकी है. कई बार इसकी शिकायत भी लोग करते रहे हैं लेकिन कार्यवाही नहीं होने के कारण अब लोगों का मनोबल भी गिर गया है. लोगों ने भी मान लिया है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और अफसरों के संरक्षण के कारण यह पूरा संगठित गिरोह काम कर रहा है और ऐसे में माफिया के गिरोह पर कार्यवाही आसान नहीं दिखता.

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