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दमोह में एक ही परिवार से उठी तीन अर्थियां, दहल उठा गांव, आखिर क्या था मामला?

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दमोह में एक ही परिवार के तीन लोगों ने दी जान

दमोह का तेंदूखेड़ा….जहां 9 जनवरी की सुबह एक ऐसी खबर लेकर आई कि पूरा इलाका दहल उठा. केवट मोहल्ले में मनीष केवट के घर के बाहर भीड़ जमा हो चुकी थी…चेहरों पर बेचैनी और एक अनजान खौफ था.जो बता रहा था कि घर के अंदर कुछ बेहद खौफनाक हुआ है. पुलिस भी मौके पर पहुंच चुकी थी और जब लोग घर के अंदर दाखिल हुए तो रूह कांप उठी. ऐसा लग रहा था जैसे मौत ने घर के अंदर तांडव किया हो. एक या दो नहीं, बल्कि तीन तीन लाशें फंदे पर लटकी हुई थी. पूरा का पूरा परिवार मौत के आगोश में समा चुका था.मनीष की पत्नी की लाश साड़ी के फंदे से लटकी थी…तो मनीष और उसकी दो साल की बेटी एक ही रस्सी के फंदे से झूल रहे थे.

तस्वीरें डराने वाली थीं

मंजर खौफनाक था. तस्वीरें डराने वाली थी. किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि आखिर मनीष और उसका परिवार अब इस दुनिया में नहीं है. लाशों को नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता है और कमरे की बारीकी से जांच पड़ताल की जाती है ताकि इन मौतों से जुड़ा कोई सुराग मिल सके..पहली नजर में मामला आत्महत्या का लग रहा था.

पुलिस के हाथ नहीं लगा सुसाइड नोट

पुलिस सुसाइड नोट तलाशती है लेकिन कुछ हाथ नहीं लगता. हालांकि दीवार पर कुछ शब्द जरूर नजर आते हैं. लेकिन वो इतने साफ नहीं कि पढ़े जा सके. लिहाजा फॉरेंसिक की टीम उन्हें डिकोट करने में जुटी है. लेकिन धुंधला-धुंधला कुछ ऐसा नजर आ रहा था कि जैसे लिखा हो कि जो इस घर में रहेगा वो मर जाएगा, तो सवाल यही हैं कि आखिर ऐसा क्यों लिखा गया. क्या ये घर से जुड़ा कोई मामला है. कहीं तीनों की मौत का कनेक्शन इसी घर से है.

कहीं ऐसा तो नहीं कि घर को लेकर कोई विवाद था. जिसके चलते तीनों ने आत्महत्या की है…या फिर घर से जुड़े विवाद में तीनों की हत्या कर लाशों को फंदे पर लटकाया गया और हत्यारा ये धमकी लिखकर गया कि जो इस घर में रहेगा वो मर जाएगा.

पुलिस के सामने कई सवाल थे. इधर घर से तीन-तीन अर्थियां एक साथ उठने लगी थीं, जिन्हें देखकर हर किसी का कलेजा कांप रहा था. तीन-तीन चिताएं एक साथ सजना किसी को भी हैरान कर रहा था. उधर पुलिस पूछताछ में जुटी थी, तभी कुछ ऐसा पता चलता है, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया और जिसका अंदेशा था…कहानी कुछ वैसी ही नजर आ रही थ, क्योंकि कहीं ना कही इन मौतों का कनेक्शन घर से ही जुड़ रहा था, जिसकी शुरुआत तीन चार साल पहले होती है.

एक साथ तीन जिंदगियां खत्म

अमबाही का रहने वाला मनीष अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रहा था. मनीष ने दसोदा के साथ शादी कर अपनी दुनिया बसा ली थी. शादी के बाद मनीष इसी घर में किराए से रहने आया था. दोनों की जिंदगी खुशहाल थी. मनीष ने अपने घर का सपना पूरा करने के लिए तीन साल पहले इस मकान का सौदा कर लिया था. मकान मालिक से ढाई लाख रुपये में मकान का सौदा कर लिया था. सिर्फ 50 हजार रुपये बाकी थे.

मनीष ये रुपये नहीं दे पाया, जिसके बाद मकान मालिक ने तीन से साढ़े तीन लाख रुपये में ये मकान किसी और को बेच दिया और मनीष पर मकान खाली करने के लिए दबाव डालने लगा, परिवार के मुताबिक मकान मालिक मनीष के 2 लाख रुपये भी नहीं लौटा रहा था, नया खरीदार भी मकान खाली करने के लिए दबाव डालने लगा, इस बात से मनीष तनाव में रहने लगा. मनीष टूट चुका था क्योंकि अब ना उसके पास रहने के लिए घर था और ना उसकी जिंदगी भर की कमाई से इकट्ठा किए दो लाख रुपये, जिसके चलते उसने इतना खौफनाक कदम उठा लिया.

सच क्या है इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद हो जाएगा लेकिन एक परिवार का इस तरह फांसी पर झूलना हर किसी को हैरान कर रहा है. आखिर वो ऐसा कौन सा तनाव होगा, जिसने पूरे परिवार को मरने पर मजबूर कर दिया. आखिर वो कौन सी साजिश है, जिसने तीन-तीन जिंदगियों को खत्म कर लिया, क्या कहानी सिर्फ उतनी ही है, जो बाहर नजर आ रही है या फिर इस सामूहिक हत्याकांड के पीछे छिपा है. कोई घिनौना राज जो अभी तक पुलिस और लोगों की नजरों से दूर है, सवाल कई है. इस घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया है, क्योंकि एक साथ-तीन-तीन जिंदगियों का यूं खत्म होना कोई सामान्य वारदात नहीं है.

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