Hanuman Ansh: भक्ति और आध्यात्मिकता पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों सिनेमाघरों में दर्शकों की पसंद बनी हुई है. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म नीम करौरी बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं को दिखाती है. 7 अगस्त को रिलीज हुई फिल्म ने अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर लिया है. फिल्म की सफलता के बाद दर्शक इसके OTT रिलीज का इंतजार कर रहे हैं.
OTT प्लेटफॉर्म को लेकर स्थिति साफ नहीं
फिल्म के डिजिटल राइट्स किस OTT प्लेटफॉर्म के पास जाएंगे, इसे लेकर अभी कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है. कुछ समय पहले खबरें आई थीं कि फिल्म को 100 करोड़ रुपये की OTT डील मिली है. हालांकि, अब निर्माता रागिनी सोना ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
निर्माता रागिनी सोना ने अफवाहों पर लगाई रोक
एक इंटरव्यू में रागिनी सोना ने कहा कि फिलहाल टीम का ध्यान OTT डील से ज्यादा दर्शकों पर है. उन्होंने बताया कि फिल्म की डिजटल रिलज को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है. उन्होंने 100 करोड़ रुपये की डील वाली खबर को अफवाह बताया और लोगों से ऐसी बातों पर ध्यान न देने की अपील की.
‘अभी हमें OTT की जरूरत नहीं’
रागिनी सोना के अनुसार, टीम अभी किसी OTT ऑफर की तलाश में भी नहीं है. उनका कहना है कि फिल्म को मिल रहा दर्शकों का प्यार सबसे ज्यादा मायने रखता है. OTT से जुड़ा कोई भी फैसला टीम की आपसी चर्चा के बाद लिया जाएगा और सही समय पर इसकी ऑफिशियल जानकारी दी जाएगी.
OTT प्लेटफॉर्म से पहले हो चुका है संपर्क
हनुमान अंश फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इससे पहले बताया था कि उन्होंने फिल्म की कहानी एक OTT प्लेटफॉर्म को सुनाई थी. वहां उनसे ऐसी भारतीय कहानी के बारे में पूछा गया था, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रासंगिकता हो. चतुर्वेदी ने नीम करौरी बाबनिर्देशक ने कहा कि उन्हें फिल्म की कहानी के रिजेक्ट होने से ज्यादा परेशानी नहीं थी, क्योंकि फिल्मकारों को अक्सर रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है. लेकिन जिस तरीके और भाषा में उनकी कहानी को ठुकराया गया, वह उन्हें पसंद नहीं आया. इस घटना के बाद उन्हें लगा कि भारतीय संतों और आध्यत्मिक विचारों की कहानी सुनाई और इस दौरान वह भावुक भी हो गए.
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रिजेक्शन के तरीके से आहत हुए निर्देशक
निर्देशक ने कहा कि उन्हें फिल्म की कहानी के रिजेक्ट होने से ज्यादा परेशानी नहीं थी, क्योंकि फिल्मकारों को अक्सर रिजेक्शन का सामना करना पड़ता है. लेकिन जिस तरीके और भाषा में उनकी कहानी को ठुकराया गया, वह उन्हें पसंद नहीं आया. इस घटना के बाद उन्हें लगा कि भारतीय संतों और आध्यात्मिक विचारों को दुनिया के सामने रखने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है.
