Jai Jai Ram Song Released: रणबीर कपूर की अपकमिंग पौराणिक फिल्म रामायण को लेकर दुनियाभर में क्रेज देखने को मिल रहा है. हर कोई फिल्म की एक झलक देखने के लिए बेताब हो रहा है. जब से रामायण फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ है, तब से दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर एक अलग ही एक्साइटमेंट बना हुआ है. आज गणेश चतुर्थी के मौके पर मेकर्स ने फिल्म रामायण का पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज किया है.
इस गाने में भगवान राम और माता सीता की झलकियां दिखाई गई हैं. रामायण फिल्म का गाना सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और दर्शक इसे खूब पसंद कर रहे हैं. गाने को सुनने के बाद मन में शांति उत्पन्न होती है और शरीर में एक अलग ही ऊर्जा प्राप्त होती है.
गणेश चतुर्थी के मौके पर रामायण का गाना रिलीज
आज 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व है. इस खास मौके पर मेकर्स ने फिल्म ‘रामायण’ का पहला गाना रिलीज कर त्योहार की खुशियों को दोगुना कर दिया है. जारी किए गए वीडियो में भगवान राम का किरदार निभा रहे रणबीर कपूर, माता सीता की भूमिका में नजर आ रहीं साई पल्लवी के बालों में फूल लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं. आज गणेश चतुर्थी के साथ-साथ कई त्योहारों की धूम है. इस पावन बेला के बीच ‘रामायण’ के इस दिव्य गीत ने भक्ति के इस संगम को और भी ज्यादा भावपूर्ण और रंगीन बना दिया है.
ये भी पढ़ें-Hanuman Ansh BO: ‘हनुमान अंश’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, 36वें दिन कमाई 200 करोड़ के पार
‘जय जय राम’ शब्दों में समाहित है संपूर्ण प्रार्थना
एआर रहमान के संगीत, अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की आवाज तथा डॉ. कुमार विश्वास के शब्दों से सजे इस गीत ने रिलीज के साथ ही संगीत और सिनेमा जगत में चर्चा बटोरनी शुरू कर दी है. नितेश तिवारी निर्देशित इस महत्त्वाकांक्षी फिल्म में रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश और सनी देओल जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में हैं.
देश के जाने-माने कवि डॉ. कुमार विश्वास ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘जय जय राम’ तीन सरल शब्द हैं, लेकिन इनके भीतर एक संपूर्ण प्रार्थना समाहित है. इसे लिखते समय मेरा प्रयास श्रीराम का वर्णन करना नहीं था, क्योंकि श्रीराम को शब्दों में बांधा ही नहीं जा सकता. मेरा प्रयास उस संबंध को अभिव्यक्त करना था, जो प्रत्येक भक्त अपने राम के साथ अनुभव करता है.
यह संबंध भक्त और भगवान के बीच विशेषकर श्रीराम के विषय में एक मार्गदर्शक और आत्मबल को बढ़ाने की शक्ति देने वाले एक आदर्श के रूप में रहता है.” उन्होंने आगे कहा कि गीत की भाषा को जानबूझकर सहज और सीधा रखा गया है, क्योंकि सच्ची भक्ति को किसी विशेष शब्द संयोजन की आवश्यकता नहीं होती. उन्होंने कहा कि श्रोता इसे केवल सुनें नहीं, बल्कि इसके भीतर अपनी स्वयं की प्रार्थना भी खोज सकें.
