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Vadh 2 Review: संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की शानदार एक्टिंग, सीट से हिलने नहीं देगा फिल्म का सस्पेंस

vadh 2

वध 2

Vadh 2 Review: दोस्तों, सोशल मीडिया पर एक टर्म यूज होता है ‘Absolute Cinema’ और जब भी आप कोई फिल्म देखते हैं, तो उस फिल्म में ये Absolute Cinema वाली Quality जरूर देखते हैं. लेकिन ऐसी फिल्में बहुत कम आती हैं जो Absolute Cinema हो, बीते दिनों धुरंधर आई और धमाल मचा गई. अब एक और ऐसी फिल्म आयी है जिसे देखकर मुझे लगा कि भाई ये है Absolute Cinema. इस फिल्म का नाम है ‘वध-2’. इस फिल्म को देखने से पहले बता दूं कि अगर आपको लगता है कि आप शेरलॉक होम्स के रिश्तेदार हैं या आप सस्ते ब्योमकेश बक्शी हैं और हर मर्डर मिस्ट्री में कातिल कौन है… आपको पता चल जाता है तो यहां ऐसा नहीं होगा.

आपको लगेगा कि आपको कुछ तो पता चल रहा है लेकिन ऐसा नहीं होगा, वध-1 में जो शॉकिंग फैक्टर था वो वध 2 में ज्यादा है. पहले बता दूं कि इसकी कहानी पहले पार्ट से बिल्कुल अलग है.

कहानी

कहानी शिवपुरी की एक जेल में सेट है जो एक बार फिर शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) और मंजू (नीना गुप्ता) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो दो प्रेमी हैं और एक-दूसरे को चाहते हैं. शंभूनाथ एक जेल गार्ड है जो अपने बेटे की पढ़ाई को लेकर फिर से भारी कर्ज़ में डूबा हुआ है. जेल में अपने काम के अलावा, वह सब्जियां भी चुराता है और कर्ज़ चुकाने के लिए कुछ एक्स्ट्रा इनकम के लिए उन्हें बाहर बेचता है. वहीं मंजू जो एक इज्ज़तदार कैदियों में से एक है, जिसे हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई है. लेकिन उसकी जेल की सज़ा खत्म होने वाली है और वह बाहर निकलने वाली है. इन सबके बीच, एक जवान लड़की, नैना कुमारी (योगिता बिहानी) है, जिसे गलत इल्जामों में जेल में डाला गया है. जैसे ही उसे बेल मिलने वाली होती है, उसे एक कैदी केशव (अक्षय डोगरा) जो एक गुंडा है और एक पॉलिटिशियन का भाई है, रोक देता है. उसके नैना के प्रति गलत इरादे हैं. लेकिन अचानक वो गायब हो जाता है.

अब केशव कहां गया है. क्या वह भाग गया है? उसे ढूंढने के लिए, इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर अतीत सिंह को भेजा जाता है. अब केशव कहां गया, क्यों गया और फिल्म का नाम वध है, तो क्या केशव का वध हो गया या किसी और का?

एक्टिंग

संजय मिश्रा और नीना गुप्ता ऐसे एक्टर हैं जिनके काम का रिव्यू किया ही नहीं जा सकता. अगर ये दोनों फिल्म में हैं तो अच्छी एक्टिंग की गारंटी होती है और यही हुआ भी है, दोनों ने क्या कमाल परफॉरमेंस दी है. वो इतने नैचुरल एक्टर हैं कि हर रोल में अंदर तक घुस जाते हैं. कुमुद मिश्रा लाजवाब हैं, जिस तरह उन्होंने जेलर का किरदार निभाया है वो अपने आप में अनोखा है. जात-पात में विश्वास रखने वाला ईमानदार जेलर, कुमुद बता देते हैं कि वो कमाल एक्टर हैं. अमित सिंह ने पुलिसवाले का बेहतरीन किरदार निभाया है.

संजय मिश्रा और नीना गुप्ता के आगे वो फीके नहीं पड़े. अक्षय डोगरा खतरनाक लगे हैं और अपने किरदार में उन्होंने जान डाल दी है. शिल्पा शुक्ला का काम बढ़िया है. योगिता बिहानी ने मासूमियत से अपने किरदार को बखूबी निभाया है.

डायरेक्शन

जसपाल सिंह संधू ने वध बनाकर अपना लेवल पहले ही बढ़ा लिया था और अब ‘वध 2’ के डार्क और रहस्यमय माहौल को काफी संतुलित तरीके से संभाल कर उन्होंने वो लेवल अप कर लिया है. मजबूत कहानी और दिलचस्प स्क्रिप्ट के साथ मर्डर मिस्ट्री को पर्दे पर उतारना आसान नहीं होता, लेकिन इस मोर्चे पर वह काफी हद तक सफल नजर आते हैं.

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ओवरऑल कैसी है फिल्म?

इस फिल्म का स्क्रीनप्ले शानदार है. यह फिल्म आपको सीट से उठने और मोबाइल देखने तक का मौका नहीं देती. फिल्म एक अच्छी पेस पर चलती है, सस्पेंस बरकरार रहता है, एक-एक करके परतें खुलती हैं और आपको लगता है कि आपको तो सब पता है. लेकिन क्लाइमैक्स आपको ऐसा झटका देगा कि आप सोच भी नहीं पाएंगे. 2 घंटे 10 मिनट की फिल्म में एक भी मिनट एक्स्ट्रा नहीं लगता. ऐसी फिल्में अक्सर लोग थिएटर जाकर नहीं देखते, क्योंकि इनमें कोई सुपरस्टार नहीं है. लेकिन ये कमाल फिल्म है.

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