PM Modi Red Fort Live Telecast: कल 15 अगस्त है और इस खास दिन को हर भारतीय नागरिक स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाता है. इसी दिन साल 1947 में देश गुलामी की जंजीरों से मुक्त हुआ था और सदियों बाद ऐतिहासिक लाल कले पर भारत का तिरंगा झंडा फहराया गया था. स्वतंत्रता दिवस के इस दिन को न केवल हम जश्न के रूप में मनाते हैं, बल्कि हम उन वीरों को भी याद करते हैं, जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी.
इस साल हिंदुस्तान 80वें आजादी के जश्न को मना रहा है. हर साल की तरह इस साल भी राजधानी दिल्ली में स्थित लाल किला मैदन से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आजादी के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे.कई लोग इस सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होंगे, वहीं कई नागरिक घर से ही पीएम मोदी के संबोधन का लाइव टेलीकास्ट देखने के इंतजार में हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस बार के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम और पीएम मोदी का लाइव संबोधन कैसे और कहां देखा जा सकेगा.
कहां देखें लाइव टेलीकास्ट?
लाल किले पर होने वाले 15 अगस्त के कार्यक्रम को आप राष्ट्रीय टीवी चैनल DD News पर लाइव देख सकते हैं. इसके साथ ही देश की अलग-अलग समाचार वेबसाइटों पर भी इस समारोह से जुड़ी पल-पल की खबरें पढ़ी जा सकती हैं. अगर आप सोशल मीडिया या इंटरनेट पर देखना चाहते हैं, तो प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर प्रधानमंत्री के भाषण और पूरे कार्यक्रम का Live Stream देख सकते हैं.
मुख्य कार्यक्रम का समय इस प्रकार है
इस मुख्य समारोह की शुरुआत सुबह करीब 7:30 बजे होगी. जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किला पहुंचेंगे, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दूसरे बड़े अधिकारी उनका स्वागत करेंगे. इसके तुरंत बाद भारतीय सेना और दिल्ली पुलिस के जवान प्रधानमंत्री को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देंगे.
- सुबह 7:35 बजे: प्रधानमंत्री द्वारा तिरंगा झंडा फहराया जाएगा.
- सुबह 7:37 बजे: राष्ट्रगान की धुन के साथ तिरंगे को राष्ट्रीय सलामी दी जाएगी.
- सुबह 7:45 बजे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश के नाम संबोधन शुरू होगा.
पीएम मोदी कर सकते हैं कोई बड़ी घोषणा
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल 15 अगस्त को देश के नाम अपने भाषण में कई बड़ी घोषणाएं करते रहे हैं. साल 2024 के स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने लाल किले से 98 मिनट का लंबा भाषण दिया था. अपने उस भाषण में उन्होंने मौजूदा सिविल कोड को ‘सांप्रदायिक’ और ‘भेदभाव’ बढ़ाने वाला बताते हुए, उसकी जगह पूरे देश के लिए एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ नागरिक संहिता लागू करने की वकालत की थी. इसके साथ ही उन्होंने देश मे लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने यानी ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार का भी खुलकर समर्थन किया था.
