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जंतर-मंतर पर आरक्षण हटाओ आंदोलन, इन 5 मांगों को लेकर मैदान में उतरे प्रदर्शनकारी

जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी

जंतर-मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी

Aarakshan Hatao Andolan Jantar Mantar: देश की राजधानी जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है. शुक्रवार को शुरू हुआ यह प्रदर्शन दूसरे दिन शनिवार को भी जारी है. प्रदर्शनकारी आरक्षण देने के नियमों में बदलाव की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि आरक्षण की जरूरत किसे है, यह तय करते समय आर्थिक हालात पर ध्यान दिया जाना चाहिए. इस प्रदर्शन की शुरुआत सोशल मीडिया के ज़रिए ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ से हुई थी.

प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि आरक्षण किसे दिया जाना चाहिए? यह सिर्फ जाति से तय नहीं होना चाहिए. बल्कि आर्थिक रूप से पिछड़े हर वर्ग को मिलना चाहिए. कुल मिलाकर प्रदर्शनकारी 5 मांगों को लेकर मैदान में उतरे हैं.

क्‍या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?

जाति नहीं आर्थिक हालात पर हो फैसला
 
प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि सरकारी मदद की जरूरत किसे है, यह तय करते समय आर्थिक हालात पर ध्यान दिया जाना चाहिए. अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा से जुड़े एक प्रदर्शनकारी ने कहा कहा कि आरक्षण जाति से परे हटकर, किसी गरीब व्यक्ति को शिक्षा, कोचिंग और अन्य जरूरतों के लिए मदद मिलनी चाहिए.

कोटे के अंदर कोटा

प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग की है. उन्‍होंने तर्क दिया कि इसका फायदा हमेशा आरक्षित श्रेणियों के भीतर सबसे पिछड़े लोगों को नहीं मिला है. सरकार को यह जांचना चाहिए कि क्या मौजूदा सिस्टम अपने मकसद को पूरा कर रहा है. उन्‍होंने सवाल उठाया कि  इसका फायदा जमीनी स्तर पर लोगों तक पहुंच रहा है? इसका भी पता लगाना चाहिए.

आरक्षण पर श्वेत पत्र

यूटूबर अजीत भारती ने बताया कि  सरकार आरक्षण व्यवस्था और पिछले आठ दशकों चल रही है. इसके बाद भी आज तक श्वेत पत्र जारी नहीं किया गया है. सरकार को श्वेत पत्र जारी करनी चाह‍िए. उन्होंने बिहार के मुसहर समुदाय का उदाहरण दिया, जिन्हें उनके अनुसार सीमित राजनीतिक प्रतिनिधित्व के कारण आरक्षण व्यवस्था से पर्याप्त लाभ नहीं मिला है,.

उच्च शिक्षा के लिए न्यूनतम अंक

एक और बड़ी मांग यह थी कि उच्च शिक्षण संस्थानों, जिनमें प्रमुख संस्थान भी शामिल हैं. उनमें एडमिशन के लिए न्यूनतम अंक तय किए जाने चाहिए. आप मेरिट से समझौता करके विकसित भारत का सपना नहीं बेच सकते हैं. अगर 50% योग्य युवा या पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को IIT, IIM या उच्च शिक्षा में दाखिला नहीं मिलता है, तो आपकी क्षमता वहीं 50% कम हो जाती है.

EWS के फायदे बढ़ाना

प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लोगों के लिए ज़्यादा फायदों की भी मांग की है. भारती ने आगे कहा कि  आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को अनुसूचित जातियों (SC) का हिस्सा बनाया जाना चाहिए. जिस वर्ग को आर्थिक रूप से कमजोर माना गया है, न तो आप उन्हें फ़ॉर्म खरीदने में कोई सुविधा दे रहे हैं, न ही उनकी हॉस्टल फीस या कोर्स फीस माफ़ कर रहे हैं. तो सिर्फ़ उन्हें इस श्रेणी में रखने से क्या हासिल होगा?

इन पांच मांगों के अलावा के अलावा भी प्रदर्शनकारियों की कई मांगें हैं. जिनको लेकर वे देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं. 

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