Baramati Plane Crash: महाराष्ट्र की राजनीति में अपना परचम लहराने वाले अजित पवार ने बुधवार को दुनिया को अलविदा कह दिया है. बुधवार को मुंबई से बारामती चुनाव प्रचार के लिए जा रहे थे, जहां लैंडिंग के वक्त उनका विमान क्रैश कर गया. विमान में सवार अजित पवार समेत सभी पांचों लोगों की मौत हो गई. अजित पवार के निधन के बाद विमान हादसे की जांच तेज हो गई है. शुरुआती जांच के अनुसार विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी. अब जांच की सुई इन तीन सवालों पर टिकी हुई है. आज उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया जा रहा है, जिसमें गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे. यहां जानें आखिरी के वो 7 मिनट, उस दौरान क्या हुआ था?
यह हादसा इतना भीषण था कि शव को पहचान पाना मुश्किल हो गया था. पुलिस ने उनकी घड़ी के आधार पर शव की पहचान की. अजित पवार को घड़ी का काफी शौक भी रहा है. उनकी पार्टी का चुनाव चिंह भी घड़ी ही था. अजित पवार ने बुधवार की सुबह करीब 8 बजकर 45 मिनट में दुनिया को अलविदा कह दिया. अब सबके मन में एक ही सवाल उमड़ रहा है कि आखिरी वक्त के दौरान ऐसा क्या हुआ कि विमान क्रैश हो गया, उसे बचाया नहीं जा सका. सबकी निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हुई हैं.
आखिरी वक्त में क्या बातचीत हुई?
शुरुआती जांच के अनुसार, विमान उड़ाने वाले पायलट काफी अनुभवी थे. इसके बावजूद कोई भी MAYDAY कॉल नहीं गया और हादसा हो गया. जांच एजेंसियों ने चांज की तो पता चला कि विमान मुंबई से बारामती के लिए सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर रवाना हुआ. बारामती पहुंचते ही करीब 8 बजकर 37 मिनट पर रडार से गायब हो गया. दो मिनट बाद फिर रडार पर दिखाई दिया. आंकड़ों के अनुसार पायलट ने लैंडिंग को बीच में ही छोड़कर दोबारा ऊंचाई ली. इसके बाद लैंडिंग कराने की कोशिश की लेकिन हो नहीं सकी. इसकी वजह खराब मौसम बताया गया. पायलट ने गो-अराउंड का फैसला लेते हुए विमान को उसी दिशा में लौटा दिया.
ये भी पढ़ेंः लो विजिबिलिटी बनी हादसे की वजह? दो बार लैंडिंग की कोशिश के बाद क्रैश हुआ अजित पवार का प्लेन
इसके बाद करीब 8 बजकर 42 मिनट पर पायलट ने एटीसी को सूचित करते हुए जानकारी दी कि खराब मौसम की वजह से रनवे नहीं दिखाई दे रहा है. इस दौरान विमान को फिर से रनवे पर उतारने की कोशिश की जाती है. एटीसी ने रनवे-11 पर लैंडिंग की क्लीयरेंस दे दी. इसके बाद 8 बजकर 44 मिनट पर विमान रनवे के शुरुआती बिंदु के पास पहुंचा और अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा. जिसमें सवार अजित पवार समेत सभी 5 लोगों की मौत हो गई.
इन बिंदुओं के आधार पर हो रही जांच
- मानवीय चूक: जांच एजेंसियां हर एंगल से जांच करने में जुटी हैं, कि आखिर चूक कहां हुई. क्या पायलट ने रनवे की दूरी का गलत आकलन या गो-अराउंड के बाद दोबारा अप्रोच करने में जल्दबाजी की? इसको लेकर जांच की जा रही है. एटीसी में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक घटनाक्रम काफी तेजी से घटा, जिसमें लैंडिंग क्लीयरेंस के बाद कोई रीडबैक नहीं मिला.
- मौसम: विमान हादसे के बाद ही मौसम को लेकर हर कोई चर्चा कर रहा. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्या मौसम इतना खराब था कि पायलट को कुछ भी दिखाई नहीं दिया. सिविल एविएशन मंत्रालय के मुताबिक हादसे के दौरान विजिबिलिटी करीब 3,000 मीटर थी. ऐसे में एक सवाल और है कि क्या इतनी विजिबिलिटी के बाद भी रनवे नहीं दिखा, या ऊपर हवा में दृश्यता कम थी? वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि हवा और जमीन की दृश्यता में काफी अंतर होता है.
- तकनीकी चूक: तीसरा एंगल तकनीकी समस्या है. DGCA ने विमान को 100 प्रतिशत एयरवर्थी बताया था. यानी विमान पर कोई भी तकनीकी खराबी नहीं थी. इसके अलावा पायलट को उड़ान का काफी अनुभव भी था और मेडिकल रूप से भी काफी फिट थे. ऐसे में जब सबकुछ सही रहा तो आखिर सिस्टम कहां फेल हुआ? इसके लिए तकनीकी पहलू की जांच की जाएगी.
