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UP में ‘बाटी-चोखा’ पार्टी पर घमासान, अखिलेश ने एक तीर से साधे 2 निशाने, किसके लिए था इशारा?

Akhilesh Yadav Bati Chokha Party

अखिलेश यादव ने रखी बाटी चोखा पार्टी

UP Politics: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने नए साल के उपलक्ष्य में ‘बाटी-चोखा’ की दावत दी. दावत के बाद यूपी की राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है. क्योंकि इससे पहले विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान ठाकुर विधायकों की जुगलबंदी फिर शीतकालीन सत्र के दौरान ब्राह्मण विधायकों का ‘सहभोज’ आयोजित किया गया था. ब्राह्मण विधायकों की बैठक के बाद यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी थी और कहा कि आगे से अगर कोई ऐसा करता है तो पार्टी अनुसाशन के खिलाफ माना जाएगा और कार्रवाई की जाएगी. अखिलेश यादव की ‘बाटी-चोखा’ पार्टी को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि यह सीधे तौर पर भाजपा के अंदर चल रहे ‘ब्राह्मण बनाम संगठन’ पर कटाक्ष करने के लिए रखी गई थी. इस दौरान अखिलेश ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा.

अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पार्टी की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘नव वर्ष’ पर जो भी मिलने आया, अपना स्नेह-आशीर्वाद संग लाया’.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव ने सियासत को थाली तक उतार दिया. अखिलेश यादव की पार्टी कोई सामान्य आयोजन नहीं था, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था. इस आयोजन के माध्यम से भाजपा पर निशाना साधना था. क्योंकि हाल ही में ब्राह्मण विधायकों के सहभोज पर भाजपा ने आपत्ति जताई थी.

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पार्टी के बहाने भाजपा पर निशाना साधने का प्रयास

ब्राह्मण विधायकों को भाजपा से मिली चेतावनी के एक हफ्ते बाद ही समाजवादी पार्टी ने सार्वजनिक रूप से ‘बाटी-चोखा’ सहभोज का आयोजन कर सीधे तौर पर बीजेपी पर निशाना साधने का प्रयास किया. उन्होंने तो पार्टी के दौरान यह तक कह दिया कि आपसी झगड़ों में बाटी-चोखा को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए. अब उनकी इस ‘बाटी-चोखा’ पार्टी को लोग ब्राह्मण वोटरों को एकजुट करने की रणनीति मान रहे हैं.

1 तीर से 2 निशाना साधने की कोशिश

लोगों का मानना है कि अखिलेश यादव ने इन आयोजन के जरिए एक तीर से दो निशाना साधने का प्रयास किया है. पहला जहां भाजपा अपने ब्राह्मण विधायकों के सहभोज से नाराज है तो वहीं सपा अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में जुटी है. दूसरा, ‘बाटी-चोखा’ पूर्वी यूपी की पहचान भी है. इसे पारंपरिक व्यंजन माना जाता है. इसलिए ‘बाटी-चोखा’ एक-साथ सभी विधायकों के साथ खाकर एकजुटता का परिचय देना. उन्होंने साफ कहा कि खान-पान पर राजनीति करना सही नहीं है.

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