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जनवरी महीने में बांकीपुर सीट पर हार हो गई थी तय! क्‍यों सवर्णों ने छोड़ द‍िया बीजेपी का साथ?

नितिन नबीन(File Photo)

नितिन नबीन(File Photo)

Bankipur BJP Defeat Analysis: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. हार के बाद ये बात कही जा रही है कि पार्टी इस पर मंथन करेगी. भले ही मंथन हार के कई कारण बताए जाएं. लेकिन बांकीपुर में बीजेपी के हारने की असली वजह सवर्णों की नाराजगी है. इसी तरह की नाराजगी साल 2022 के बोचहां उपचुनाव में भी झेलनी पड़ी थी.

बोचहां उपचुनाव हो या फिर बांकीपुर उपचुनाव दोनों ही सीट सवर्णों की नाराजगी की वजह से बीजेपी हारी है. लोगों का कहना है कि बीजेपी जिसे वह लंबे समय से साथ दे रहे हैं. इसके बाद भी पार्टी लगातार सवर्णों की उपेक्षा कर रही है. इसी बात का पता लगाने में भाजपा के सारे कद्दावर नेता इसे पढ़ने में चूक गए.

सर्वण क्यों हुए बीजेपी से नाराज?

बीजेपी पर अब सवर्णों की अनदेखी का आरोप लगा रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि जो लोग सालों से बीजेपी के साथ थे, उन्हें ही बीजेपी क‍िनारे लगाने में लगी है. बांकीपुर जहां करीब 37 फीसदी सवर्ण वोटर हैं. ये वोटर इस साल की शुरुआत में ही बीजेपी से छिटक गए थे. तभी यह तय कर लिया था कि बीजेपी को सबक सिखाना होगा.

जनवरी महीने में केंद्र की मोदी सरकार की तरफ से नया यूजीसी एक्ट लाया गया था. उस समय देशभर में इस एक्ट को लेकर जमकर विरोध हुआ था. सोशल मीडिया हो या फिर सड़क, हर जगह बीजेपी बैकफुट पर आ गई थी. हालांकि बाद में इस बिल को टाल दिया गया था.

समझने में भूल कर गई बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी ने भले ही उस समय यूजीसी बिल वापस ले लिया. इसके साथ ही यह भी समझ लिया कि सवर्ण वोटर कहां जाएंगे? उनके पास कोई विकल्प ही नहीं है. लेकिन वोटर ने अपना विकल्प जन सुराज को बना लिया, जिसका खामियाजा बांकीपुर में बीजेपी को भुगतना पड़ा है.

बीजेपी की 19342 वोटों से हार को सवर्णों के इसी गुस्से का नतीजा माना जा रहा है. यही कारण है कि B फैक्टर यानी बोचहां के बाद बांकीपुर में भी बीजेपी को वो मिला, जिसकी उम्मीद तक नहीं की गई थी. खासतौर पर इस इस तरह की उम्‍मीद कि जितने वोट से प‍िछला चुनाव जीता, इस बार उसी सीट पर उपचुनाव में बीजेपी को उतने वोट भी नहीं मिले.

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