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बैकफुट पर बार काउंसिल! अध्यक्ष मनन मिश्रा ने लॉ स्टूडेंट्स से माफी मांगी, क्‍या है पूरा मामला

मनन कुमार मिश्रा

मनन कुमार मिश्रा

Bar Council Order: हैदराबाद की NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी में शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. यह व‍िवाद अब छात्र अधिकार, अभिव्यक्ति की आजादी और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की भूमिका पर बहस में बदल गया है. विवाद की शुरुआत करीब 450 छात्रों के उस विरोध से हुई, जिसमें उन्होंने दीक्षांत समारोह में सीजेआई सूर्यकांत को चीफ गेस्‍ट बनाए जाने पर आपत्ति जताई. छात्रों की नाराजगी CJI से जुड़े कुछ न्यायिक मामलों और टिप्पणियों को लेकर थी.

मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब BCI ने NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को अगले आदेश तक वकील के रूप में एनरोल न करने का निर्देश जारी कर दिया. इसका मतलब था कि प्रभावित छात्र अदालतों में वकालत शुरू नहीं कर पाते.

BCI की कार्रवाई को लेकर छात्रों ने सवाल उठाया. छात्रों ने कहा कि कुछ छात्रों के विरोध के लिए पूरे बैच को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है. यही वजह है कि यह मामला पूरे देश में चर्चा का व‍िषय बन गया.

कॉलेज से मांगी गई छात्रों की जानकारी

NALSAR छात्र संघ ने BCI के पत्र की भाषा पर भी कड़ी आपत्ति जताई. संघ का आरोप था कि पत्र में छात्रों, फैकल्टी, रिसर्च स्कॉलर्स और पूर्व छात्रों तक की पहचान मांगी गई. इसके साथ ही विश्वविद्यालय में ‘गुटबाजी’ तथा छात्रों को ‘गुमराह’ करने जैसे आरोप लगाए गए. छात्रों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निजता के अधिकार से जोड़ते हुए अनुच्छेद 19(1)(a) का सवाल उठाया.

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो CJI सूर्यकांत की पीठ ने BCI की कार्रवाई पर नाराजगी जताई. अदालत ने सवाल उठाया कि अगर छात्र शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं तो BCI उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों कर रही है? CJI ने इसे छात्रों और अपने बीच का संवाद बताया है. उन्‍होंने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जोर दिया. इसके बाद BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया.

आदेश वापस लेने के बाद भी नहीं हुआ मामला शांत

हालांकि आदेश वापस होने के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ. NALSAR छात्र संघ ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से उनके पत्र की भाषा और छात्रों-फैकल्टी के बारे में की गई टिप्पणियों के लिए माफी मांगने की मांग की. 440 पूर्व छात्रों ने भी खुला पत्र लिखकर सवाल उठाए.

मनन मिश्रा ने मांगी माफी

आखिरकार 15 अगस्त को मनन मिश्रा ने छात्रों से माफी मांग ली. उन्होंने कहा कि यदि उनकी किसी बात या पत्र से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका अफसोस है. उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों की चिंताएं उनके लिए महत्वपूर्ण हैं. माफी मांगना अहंकार या प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है.

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